आज़म खान के ये करीबी रिटायर्ड IAS अफसर BJP में हुए शामिल

अखिलेश यादव की सरकार में आज़म खान के मंत्री रहते एसपी सिंह उनके काफी करीबी अफसर थे. लखनऊ में हुए सदस्यता अभियान कार्यक्रम के दौरान एसपी सिंह अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल हुए.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 20, 2019, 12:26 PM IST
आज़म खान के ये करीबी रिटायर्ड IAS अफसर BJP में हुए शामिल
आजम खान के करीबी पूर्व आईएएस ने ज्वाइन की बीजेपी
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Updated: August 20, 2019, 12:26 PM IST
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के कद्दावर नेता और रामपुर से सांसद आज़म खान (Azam Khan) की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. रामपुर जिला प्रशासन उनके खिलाफ तमाम मामलों में लगातार जांच और कार्रवाई कर रहा है. बीते सोमवार को लखनऊ में बीजेपी (BJP) के एक कार्यक्रम की चर्चा सत्ता के गलियारे में जोरों पर है. दरअसल यहां के चारबाग स्थित रविंद्रालय सभागार में भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह (Swatantra Dev Singh) ने तमाम लोगों को बीजेपी की सदस्यता दिलाई. इनमें एक नाम जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वो रिटायर्ड आईएएस एसपी सिंह का था. एसपी सिंह अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल हुए.

दरअसल एसपी सिंह रिटायरमेटं से पहले आज़म खान के बेहद करीबी अफसर माने जाते थे. पूर्व के अखिलेश यादव सरकार में आज़म खान नगर विकास मंत्री थे तो एसपी सिंह विशेष सचिव और सचिव नगर विकास रहे.

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बीजेपी के सदस्यता कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष के साथ मंच पर बैठे पूर्व आईएएस एसपी सिंह (बाएं से दूसरे)


आज़म खान के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज

उधर सोमवार को ही आज़म खान के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है. आज़म पर शत्रु संपत्ति को वफ्फ़ संपत्ति में दर्ज करने और वक्फ़ संपत्ति को हड़पने का आरोप लगा है.

जानकारी के मुताबिक, आज़म खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड लखनऊ के अध्यक्ष वसीम रिजवी और सुन्नी वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फ़ारुखी सहित वफ्फ बोर्ड के अधिकारियों सहित कुल नौ लोगों पर केस दर्ज किया गया है.

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लखनऊ के रविंद्रालय में आयोजित बीजेपी सदस्यता कार्यक्रम

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अल्लामा जमीर नकवी की शिकायत पर अजीमनगर थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है. धारा 420, 467, 468, 471, 447, 409, 201, 120बी और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत केस दर्ज किए गए हैं.

शिकायतकर्ता जमीर नकवी ने बताया कि वक्फ़ संपत्ति किसी को नहीं दी जा सकती है. न गिफ्ट की जा सकती है. यह न ट्रांसफर की जा सकती है और न रजिस्ट्री की जा सकती है. इसी प्रकार शत्रु संपत्ति भी किसी को नहीं दी जा सकती. लेकिन इन लोगों ने कानून का उल्लंघन कर शत्रु संपत्ति को वक्फ़ संपत्ति बनाया. नकली वक्फ़ गठित करने में इन लोगों का हाथ रहा है.

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First published: August 20, 2019, 12:06 PM IST
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