Babri Demolition Case: कड़ी सुरक्षा घेरे में लिया गया अदालत परिसर, कैसरबाग बस अड्डे का रास्ता बदला गया

बाबरी विध्वंस मामले में बुधवार को सीबीआइ की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला . (सांकेतिक फोटो)
बाबरी विध्वंस मामले में बुधवार को सीबीआइ की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला . (सांकेतिक फोटो)

अदालत परिसर (Court complex) की ओर जाने वाली सड़कों पर भी यातायात को बेहद नियंत्रित रखा गया है. मामले के अभियुक्तों ने अदालत परिसर में पहुंचना शुरू किया तो मुस्तैद पुलिस कर्मियों ने उनकी समुचित जांच करने के बाद ही उन्हें दाखिल होने दिया.

  • भाषा
  • Last Updated: September 30, 2020, 2:52 PM IST
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लखनऊ. अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) ढहाए जाने के मामले में बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत परिसर को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. उच्च न्यायालय के कैसरबाग (Kaiserbagh) स्थित पुराने परिसर में विशेष सीबीआई अदालत (CBI Special Court)) के आसपास ज्यादातर चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई और कैसरबाग बस अड्डे की तरफ जाने वाली बसों का रास्ता भी बदला गया.

अदालत परिसर की ओर जाने वाली सड़कों पर भी यातायात को बेहद नियंत्रित रखा गया है. मामले के अभियुक्तों ने अदालत परिसर में पहुंचना शुरू किया तो मुस्तैद पुलिस कर्मियों ने उनकी समुचित जांच करने के बाद ही उन्हें दाखिल होने दिया. अभियुक्तों के समर्थकों को बैरिकेडिंग के दूसरी ओर ही रोक लिया गया. मीडिया को भी उच्च न्यायालय परिसर में जाने की इजाजत नहीं दी गई. आसपास की ज्यादातर दुकानें बंद रहीं. लखनऊ के पुलिस आयुक्त सुजीत पांडे ने भी मौके पर पहुंच कर सुरक्षा बंदोबस्त का जायजा लिया. पुलिसकर्मी जन संबोधन प्रणाली के जरिए मीडिया कर्मियों को बैरिकेड के पीछे रहने की हिदायत देते रहे.




मामले में भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी आरोपित हैं
बता दें कि बाबरी विध्वंस मामले में बुधवार को सीबीआइ की विशेष अदालत फैसला सुनाएगी. सीबीआई के विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव  फैसला सुनाएंगे. विशेष जज सुरेंद्र कुमार के यादव के कार्यकाल का आज यह अंतिम फैसला होगा. वे आज रिटायर हो रहे हैं. गौरतलब है कि 30 सितंबर 2019 को रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने तक उन्हें सेवा विस्तार दे रखा है. 28 साल तक चले इस मुकदमे में भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी आरोपित हैं और फैसला सुनाने के समय इनमें से अधिकांश मौजूद रहेंगे. बताया जा रहा है कि निर्णय करीब दो हजार पेज का हो सकता है. इसे सुनाने के तुरंत बाद कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जायेगा. बता दें कि मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत 32 अभियुक्त हैं.


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