बाबरी विध्वंस मामला: सुनवाई कर रहे जज ने शीर्ष अदालत से मांगी पुलिस सुरक्षा

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 23, 2019, 11:23 PM IST
बाबरी विध्वंस मामला: सुनवाई कर रहे जज ने शीर्ष अदालत से मांगी पुलिस सुरक्षा
बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई कर रहे जज ने शीर्ष अदालत से पुलिस सुरक्षा की मांग की है.

बाबरी मस्जिद विध्वंस (Babri Demolition Case) मामले की सुनवाई कर रहे एक विशेष न्यायाधीश ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) से पुलिस सुरक्षा मुहैया कराए जाने की अपील की. मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती आरोपी हैं.

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बाबरी मस्जिद विध्वंस (Babri Demolition Case) मामले की सुनवाई कर रहे एक विशेष न्यायाधीश ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) से पुलिस सुरक्षा मुहैया कराए जाने की अपील की. इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती आरोपी हैं. न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन तथा न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले में दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है. पीठ ने कहा कि इस मुकदमे की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने 27 जुलाई को एक नया पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने अपने लिए सुरक्षा मुहैया कराए जाने सहित पांच अनुरोध किए हैं, जिनके बारे में हमारा सोचना है कि वे तर्कसंगत हैं. पीठ ने राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी को इन सभी पांच अनुरोधों पर दो सप्ताह के अंदर विचार करने का निर्देश दिया है.

राज्य सरकार ने नहीं जारी किया है विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश
इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 1992 के बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की लखनऊ में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ाने के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के अंदर आदेश जारी करने के आदेश दिए. न्यायालय ने 19 जुलाई को विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल इस मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तथा फैसला सुनाए जाने तक बढ़ा दिया था. बहरहाल, राज्य सरकार को इस संबंध में आदेश जारी करना है जो उसने अब तक नहीं किया है.

इन नेताओं पर लगे हैं आरोप

विशेष न्यायाधीश से शीर्ष अदालत ने कहा है कि वह 9 माह के अंदर इस मुकदमे का फैसला सुनाए. न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल केवल इसी मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने के लिए है. सेवा विस्तार के बाद भी वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियत्रंण में बने रहेंगे. बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती आरोपी हैं. इन तीनों के अलावा, उच्चतम न्यायालय ने पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार तथा साध्वी ऋतंभरा पर भी 19 अप्रैल 2017 को षड्यंत्र के आरोप लगाए थे.

इन आरोपियों की हो चुकी है मृत्यु
इस मामले में तीन अन्य रसूखदार आरोपियों गिरिराज किशोर, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल और विष्णु हरि डालमिया की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है और उनके खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई है. शीर्ष अदालत ने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, जिनके उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते विवादित ढांचे को गिराया गया था, के बारे में कहा था कि उन्हें इस संवैधानिक पद पर रहने के दौरान मुकदमे से छूट है.
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शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया था
उच्चतम न्यायालय ने 19 अप्रैल 2017 में मामले की रोजाना सुनवाई कर दो साल में मुकदमे का निपटारा करने के लिए कहा था. मध्यकालीन ढांचे के विध्वंस को अपराध बताते हुए शीर्ष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र का आरोप बहाल रखने की सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली थी. शीर्ष अदालत ने 12 फरवरी 2001 को आडवाणी और अन्य पर आपराधिक साजिश की धारा हटाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया था. न्यायालय का 2017 में फैसला आने से पहले 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराने के मामले में दो अलग-अलग मुकदमे लखनऊ और रायबरेली में चल रहे थे. पहले मामले में अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ लखनऊ की अदालत में सुनवाई चल रही थी जबकि रायबरेली में चल रहा मामला आठ अति विशिष्ठ लोगों से जुड़ा था.

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First published: August 23, 2019, 11:23 PM IST
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