CBI जज ने कहा- अयोध्या के विवादित बाबरी ढांचे को सुरक्षित रखना चाहते थे अशोक सिंघल

विहिप के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल (File Photo)
विहिप के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल (File Photo)

Babri Demolition Case Verdict: जस्टिस सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 6 दिसंबर को हुई घटना आकस्मिक थी और इसके पीछे किसी भी तरह की साजिश नहीं थी. विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल विवादित ढांचे के अंदर रखी मूर्तियों को सुरक्षित रखना चाहते थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:45 PM IST
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लखनऊ. अयोध्या (Ayodhya) के विवादित बाबरी मस्जिद ढांचा विध्वंस मामले (Babri Demolition Case) में बुधवार को लखनऊ (Lucknow) विशेष सीबीआई कोर्ट (Special CBI Court) ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह समेत तमाम 32 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया. जस्टिस सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 6 दिसंबर को हुई घटना आकस्मिक थी और इसके पीछे किसी भी तरह की साजिश नहीं थी. इतना ही नहीं विश्व हिंदू परिषद (VHP) के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल विवादित ढांचे को बचाना चाहते थे, क्योंकि वे उसके अंदर रखी मूर्तियों को सुरक्षित रखना चाहते थे.

2000 पन्नों के अपने फैसले का सारांश पढ़ते हुए जज ने कहा कि घटना वाले दिन विहिप व उसके तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल ने उग्र भीड़ को रोकने की भी कोशिश की. जज ने अशोक सिंघल के एक वीडियो का भी जिक्र अपने फैसले में किया. जज ने कहा कि जो भी आरोपी वहां मौजूद थे, सभी ने कारसेवकों को रोकने का प्रयास किया. ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि इसके पीछे साजिश रची गई थी.





कारसेवकों को भी किया दोषमुक्त
फैसला सुनाते हुए जस्टिस सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 के दिन दोपहर 12 बजे विवादित ढांचा के पीछे से पथराव शुरू हुआ. उस वक्त अशोक सिंघल ढांचे को सुरक्षित रखना चाहते थे, क्योंकि ढांचे में मूर्तियां थीं. वहां मौजूद सभी आरोपी उग्र भीड़ को रोकने की कोशिश की. जज ने कहा कि सीबीआई की तरफ से जो फोटोकॉपी साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध कराई गई, उसकी मूल प्रति पेश नहीं की गई. सीबीआई ने साध्वी ऋतंभरा व कई अन्य अभियुक्तों के भाषण के टेप को सील नहीं किया. जज ने कारसेवकों को भी दोषमुक्त कर दिया. जज ने कहा कि जो कारसेवक वहां मौजूद थे, वे सभी उन्मादी नहीं थे. बल्कि कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाया था.
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