Babri Demolition Verdict: पूर्व सीएम कल्याण सिंह बोले- सत्य की जीत हुई, फैसला ऐतिहासिक

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कल्याण सिंह का बयान.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कल्याण सिंह का बयान.

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh) ने फैसले के बाद अस्पताल के कर्मचारियों के साथ खुशी मनाई. साथ ही बचाव पक्ष के वकील की भी तारीफ की.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh) ने बाबरी विध्वंस मामले में आए फैसले का स्वागत किया है. कोरोना (COVID-19) रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद यशोदा अस्पताल में एडमिट पूर्व सीएम ने फैसले की खुशी हॉस्पिटल कर्मचारियों के साथ मनाई. कल्याण सिंह ने कहा कि ये फैसला ऐतिहासिक है. सत्य की जीत हुई है. हमें न्याय मिला है. पूर्व राज्यपाल और मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बचाव पक्ष के वकील का विशेष तौर पर धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होने पक्ष को बहुत बढ़िया तरीके से पेश किया. उन्होंने कहा कि पूरे देश में खुशी का माहौल है. गांंव-गांव में लोग इस फैसले को लेकर खुशी व्यक्त कर रहे हैं.

बता दें कि अदालत में सुनवाई के दौरान 26 आरोपी मौजूद थे, जबकि 6 आरोपी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए, जिसमें से एक पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी थे. घटना के दिन यानी कि 6 दिसंबर 1992 को कल्याण सिंह ही मुख्यमंत्री थे. गौरतलब है कि न्ययायालय ने अपने निर्णय में अभियोजन साक्षी न. 9 अंजू गुप्ता के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उपरोक्त साक्षी ने अपने बयान में माना है कि कार सेवकों की भीड़ में कुछ अपराधी और डकैत भी आ गए थे. न्यायालय ने अपने निर्णय में सीबीआई द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य समुचित साक्ष्य ना मानते हुए यह टिप्पणी की है कि वीडियो कैसेट्स में टेंपरिंग की गई है और वह सील भी नहीं थी.

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आरोपी बरी

न्यायालय ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत किए गए फोटोग्राफ्स के बारे में ये कहा है कि सीबीआई ने साक्ष्य के रूप में फोटोग्राफ्स के नेगेटिव प्रस्तुत नहीं किए. न्यायालय ने 65 एविडेंस एक्ट का हवाला देते हुए आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी किया है. निर्णय में  न्यायालय ने ये कहा है कि 6 दिसंबर 1992 को घटना पूर्व नियोजित नहीं थी. 12:00 बजे दिन में सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन 12:00 बजे के बाद ढांचे के पीछे से पत्थरबाजी शुरू हुई जो अराजक तत्वों द्वारा की गई. अशोक सिंघल का जिक्र करते हुए न्यायालय ने यह कहा है कि वह कार्य सेवकों से संयमित रहने की अपील कर रहे थे एवं कार सेवा में जल एवं बालू का प्रयोग करके कार्य सेवा करने की बात सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार किए थे, जिससे कार्य सेवकों के दोनों हाथ फंसे हुए रहे. लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने कारसेवकों के भेष में ढांचे पर आक्रमण कर दिया. यह भी ख्याल नहीं किया कि ढांचे के नीचे रामलला का मंदिर है. न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की है कि इंटेलिजेंस की रिपोर्ट पहले से थी कि कुछ आतंकवादी या अराजक तत्व अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं. न्यायालय ने सभी अभियोजन साक्ष्य के बयान के आधार पर ये पाया कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपरोक्त घटना में कोई योगदान किसी आरोपी का नहीं है और बाइज्जत बरी सभी आरोपियों को कर दिया गया.
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