बैंक लोन फ्रॉड: BSP विधायक विनय शंकर तिवारी के 20 खातों पर सीबीआई की नजर, ED भी कर सकती है जांच

बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी की बढ़ी मुश्किलें
बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी की बढ़ी मुश्किलें

छापों के दौरान सीबीआई ने कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे. इस दौरान ऐसे 20 बैंक खातों का पता भी लगाया, जिनके जरिए बैंक से लोन के रूप में लिए गए 754. 24 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 10:56 AM IST
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लखनऊ. बैंक लोन घोटाले (Bank Loan Fraud) में फंसे बसपा (BSP) विधायक विनय शंकर तिवारी (Vinay Shankar Tiwari) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. छापे के बाद अब सीबीआई (CBI) बसपा विधायक की कंपनी मेसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेस के कम से कम 20 बैंक खातों को खंगाल रही है. इतना ही नहीं सीबीआई इन बैंक खातों से हुए लेन-देन का ब्योरा भी जुटा रही है. साथ ही जल्द ही इस मामले में प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो सकती है. मनी लांड्रिंग की आशंका को देखते हुए ईडी भी जांच शुरू कर सकता है.

गौरतलब है कि 19 अक्टूबर को सीबीआई विनय शंकर तिवारी की लखनऊ, नोएडा और गोरखपुर स्थित  दो निजी कंपनियों मेसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज व मेसर्स रॉयल एंपायर मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तरों पर छापेमारी की थी. इसके बाद सीबीआई ने इन कंपनियों से जुड़े निदेशकों विनय शंकर तिवारी, उनकी पत्नी रीता तिवारी व अजीत पांडेय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था. सूत्रों के मुताबिक छापों के दौरान सीबीआई ने कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे. इस दौरान ऐसे 20 बैंक खातों का पता भी लगाया, जिनके जरिए बैंक से लोन के रूप में लिए गए 754. 24 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया है.

ईडी भी शुरू कर सकती है जांच



सूत्रों की मानें तो अब इस मामले मामले में मनी लांड्रिंग की आशंका को देखते हुए ईडी भी इसकी जांच शुरू कर सकता है. प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. विनय शंकर तिवारी पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के पुत्र हैं. वह गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से बसपा के विधायक हैं.
ये है मामला

दरअसल, बैंक आफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज की गई इस एफआईआर में कंपनी को दिए गए 754.24 करोड़ रुपये के लोन में धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि कई बैंकों से लोन लिए गए और फिर उन्हें कहीं और निवेश किया गया. लेकिन जब लोन चुकाने की बारी आई तो विनय शंकर तिवारी मुकर गए. हालांकि विनय शंकर तिवारी का कहना है कि ब्राह्मण होने की वजह से सरकार उन्हें टारगेट कर रही है.
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