ब्रेन हैमरेज से UP में हो रही चमगादड़ों की मौत, कोरोना से कोई नाता नहीं- IVRI बरेली
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ब्रेन हैमरेज से UP में हो रही चमगादड़ों की मौत, कोरोना से कोई नाता नहीं- IVRI बरेली
बरेली के आईवीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि यूपी में चमगादड़ों की मौत का कोरोना से कोई संबंध नहीं है.

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (INDIAN VETERINARY RESEARCH INSTITUTE, IVRI) बरेली के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि पोस्टमॉर्टम से साफ हो गया है कि चमगादड़ों की मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है. तेज गर्मी के कारण ऐसा हुआ होगा. फिलहाल और जांचें जारी हैं. इनकी मौत के पीछे बर्ड फ्लू की भी कोई संभावना नहीं है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्वांचल (Poorvanchal) के कई जिलों में हो रही चमगादड़ों (Bats) की मौत से सनसनी फैल गई है. लोग इसे कोरोना वायरस (COVID-19) से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वांचल में हुई चमगादड़ों की मौत से दहशत में आने की जरूरत नहीं है. इनकी मौत का कोरोना वायरस से कोई भी रिश्ता भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (INDIAN VETERINARY RESEARCH INSTITUTE, IVRI) बरेली ने खारिज कर दिया है.

जांच में चमगादड़ों में कोरोना वायरस नहीं मिला

गोरखपुर में दो दिन पहले 26 मई को दर्जनों की संख्या में चमगादड़ों की हुई मौत से सनसनी फैल गई थी. ये मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि पूर्वांचल के कुछ और जिलों से चमगादड़ों की मौत की खबरें आ गईं. इसे कोरोना वायरस से जोड़कर देखा जाने लगा. बर्ड फ्लू एक दूसरा कारण चर्चा में आ गया लेकिन, ये सभी चर्चाएं निर्मूल हैं.



IVRI बरेली के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया कि चमगादड़ों की मौत के पीछे कोरोना वायरस कारण नहीं है. चमगादड़ों के पोस्टमॉर्टम से इसका खुलासा हो गया है. चमगादड़ों में कोरोना वायरस नहीं पाया गया है. रेबीज की भी जांच की गई है लेकिन, पोस्टमॉर्टम में मौते के पीछे न तो कोरोना वायरस और ना ही रेबीज कारण पाया गया है.



तो फिर क्यों हो रही चमगादड़ों की मौत?

संस्थान के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि पोस्टमॉर्टम से साफ हो गया है कि चमगादड़ों की मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है. तेज गर्मी के कारण ऐसा हुआ होगा. पिछले दिनों पूर्वांचल में एकाएक तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच गया था. ऐसे में गर्मी के कारण ब्रेन हैमरेज होने से चमगादड़ों की मौत हुई होगी. फिलहाल और जांचें जारी हैं. इनकी मौत के पीछे बर्ड फ्लू की भी कोई संभावना नहीं है.

डॉ. आरके सिंह ने ये भी बताया कि चमगादड़ों की इम्यूनिटी (शरीर की प्रतिरोधक क्षमता) इतनी ज्यादा होती है कि उन्हें कोई पैथोजन (वायरस या बैक्टीरिया) मार नहीं सकता है. ये वायरस या बैक्टीरिया के कैरियर भले ही हो सकते हैं लेकिन, इनका खुद चमगादड़ों पर कोई असर नहीं होता है.

गोरखपुर, बलिया से आए सैंपलों की चल रही जांच

उन्होंने ये भी बताया कि गोरखपुर के अलावा पांच और सैम्पल (चमगादड़ों के शव) संस्थान जांच के लिए आए हैं. ये सैम्पल बलिया और इसके आसपास के जिलों से लाये गये हैं. जांच अभी जारी है.

ऐसे में यदि तेज गर्मी से ही चमगादड़ों की मौत हुई होगी तो ये सिलसिला अब थम जायेगा क्योंकि तापमान काफी नीचे आ गया है. बता दें कि दो दिन पहले गोरखपुर के एक बगीचे में दर्जनों चमगादड़ों के शव मिले थे. इसके बाद बलिया और जौनपुर से भी चमगादड़ों की मौत की खबरें आ गयीं. कुछ दिनों पहले कुछ कौओं की मौत की भी घटनायें सामने आयी थीं. अप्रैल में सहारनपुर में भी चमगादड़ों की मौत हुई थी लेकिन, ये बिजली का करंट लगने से हुआ था.

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First published: May 29, 2020, 8:26 AM IST
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