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लखनऊ: बेगम हजरत महल ने छुड़ा दिए थे अंग्रेजों के पसीने

लखनऊ: बेगम हजरत महल ने छुड़ा दिए थे अंग्रेजों के पसीने

बेग़म हजरत महल पार्क कों अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह की बेगम हजरत महल की याद और सम्मान में बनवाया गया था, यह पार्क कैसरबाग होटल क्लार्क अवध के पास स्तिथ है.

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित बेगम हजरत महल का नाम भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में अदम्य साहस और फक्र से लिया जाता है.जिन्होंने ने जंग-ए-आजादी में ना सिर्फ अंग्रेजों से लोहा लिया बल्कि सीधी टक्कर देते हुए उन्हें गुटने टेकने के लिए मजबूर भी कर दिया था.जब अवध के नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजों ने गद्दी से हटा कर बंदी बनाके कोलकाता भेज दिया था.तब 1857 में इनकी बेगम हज़रत महल ने हौसला दिखाते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी से अपने विश्वासपात्र अनुयाइयों के साथ मिलकर सबसे लंबे समय यानी 18 महीनों तक जंग लड़ी थी.उन्होंने ने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कादर को गद्दी पर बैठा कर अकेले ही अंग्रेज़ों से मुकाबला करती रही.

    अंग्रेजोंं को अपने युद्ध कौशल से बेगम ने दी थी शिकस्त
    बेगम हजरत महल ने अपने कुशल युद्ध नीति के दम पर चिनहट और दिलकुशा की लड़ाई में अंग्रेजो की सेना को करारी शिकस्त दी थी. इसके बाद 5 जून, 1857 को उन्होंने अपने 11 वर्षीय बेटे बिरजिस कद्र को मुगल सिंहासन के आधीन अवध का ताज पहनाया. जब अंग्रेजों ने अवध पर कब्जा कर लिया तो बेगम अपने बेटे को लेकर नेपाल चली गईं. फिर वही 7 अप्रैल 1879 को उन्होंने अंतिम सांस ली.

    आखिरी नवाब की है निशानी
    बेग़म हजरत महल पार्क कों अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह की बेगम हजरत महल की याद और सम्मान में बनवाया गया था, यह पार्क कैसरबाग होटल क्लार्क अवध के पास स्तिथ है. भारत सरकार ने बेग़म की याद में स्मारक बनवाया जिसको 15 अगस्त 1962 कों आम जनता के लिए खोला गया था.

    ऐसे मिलता है प्रवेश
    बेगम हज़रत महल पार्क में प्रवेश करने के लिए 15 रुपये का टिकट लेना पड़ता है और यहां खूबसूरत बागवानी आप का दिल जीत लेगी. बच्चों के लिए अलग अलग तरह के झूले भी लगे हुए है. आजकल लोग मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करने आते है. गेट के बाहर पार्किंग की सुविधा भी हो गयी है ताकि लोग अपना वाहन सुरक्षित खड़ा कर सके.

    Tags: 15 August, Independence day, Lucknow city, Lucknow news

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