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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने मायावती को लिखा पत्र, कहा- अब साथ आने का वक्त

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 6, 2019, 3:59 PM IST
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने मायावती को लिखा पत्र, कहा- अब साथ आने का वक्त
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने मायावती की तरफ बढ़ाया दोस्ती का हाथ

चंद्रशेखर (Chandrashekhar) ने पत्र में लिखा है कि इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बहुजन एकता है और बहुजन राजनीति को धार देकर ही इस काम को किया जा सकता है.

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लखनऊ. भीम आर्मी (Bhim Army) के चीफ (Chief) चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने बसपा सुप्रीमो मायावती (BSP Supremo Mayawati) की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए एक पत्र लिखा है. पत्र में चंद्रशेखर ने कहा कि आज बहुजन मूवमेंट (Bahujan Movement) कमजोर हो रहा है. अब वक्त आ गया है कि हमें अपने मतभेद भुलाकर एक साथ बैठना होगा और मंथन करना होगा कि इसे कैसे मजबूती प्रदान की जाए. उन्होंने पत्र में लिखा है कि इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बहुजन एकता है और बहुजन राजनीति को धार देकर ही इस काम को किया जा सकता है.

अपने चार पन्नों के पत्र में चंद्रशेखर ने मायावती से अपील की है कि कांशीराम की कोर टीम का हिस्सा होने की वजह से उनका अनुभव महत्वपूर्ण है. उम्मीद है मायावती इसके लिए समय निकालेंगी.

बहुजन समाज के लिए कठिन दौर

चंद्रशेखर ने अपने पत्र में लिखा है कि बहुजन समाज के लिए वर्तमान का दौर बहुत कठिन है. बीजेपी के शासन में बहुजन समाज पर अत्याचार बढ़ा है और उसके अधिकार छीने गए हैं. आरक्षण पर लगातार हमले हो रहे हैं. बहुजन समाज को दिए गए संवैधानिक और कानूनी संरक्षणों को छीनने की कोशिशें हो रही हैं. ऐसे समय में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए देश जिन शक्तियों और विचारों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है उसमें बहुजन विचारधारा, प्रमुख है. यही विचारधारा देश की सांप्रदायिक और जातिवादी शक्तियों को सही जवाब दे सकती है.

बीजेपी की ताकत बढ़ना चिंता का विषय

चंद्रशेखर ने आगे लिखा, 'बीजेपी ने 2014 और 2019 में बहुमत की सरकार बनाई. बीजेपी की ताकत बढ़ी है. दक्षिण भारत को छोड़कर लगभग बाकी जगह उसकी सरकार है. बहुजन आंदोलन के सबसे मजबूत गढ़ उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी की वापसी हुई है. लेकिन कांशीराम ने जिस बहुजन शासन का सपना देखा था वह एक बार फिर कमजोर हुआ है. पूरे देश में बहुजनों का शासन होगा यह सपना कमजोर हुआ है. ऐसे में जरुरी है कि बहुजन आंदोलन अपने अंदर झांके और इस बात का आत्म निरीक्षण करें कि कहीं हममें ही कोई कमी तो नहीं आ गई है. यह वक्त है यह सोचने का कि बदलती रणनीति की सही जवाबी रणनीति बनाने में हमसे कोई चूक तो नहीं हो गई.

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First published: November 6, 2019, 3:36 PM IST
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