UP: पीएसी के 900 जवानों को बड़ी राहत, सीएम योगी ने तत्काल प्रमोशन के लिए दिया आदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बडा़ फैसला लिया है. (File Photo)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बडा़ फैसला लिया है. (File Photo)

सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityyanath) ने कहा कि पुलिस के जवानों का मनोबल गिराने वाला कोई निर्णय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 12:04 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पुलिस महकमे के लिए बड़ी ख़बर है. पीएसी (PAC) जवानों को प्रमोशन न देने के निर्णय को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने नाराजगी जताई है. सीएम ने पीएसी जवानों को तत्काल प्रमोशन (Promotion) देने के आदेश दिए हैं. साथ ही शासन को जानकारी दिए बग़ैर निर्णय करने वाले अफ़सर के ख़िलाफ़ जांच के आदेश दे दिए हैं. सीएम योगी ने कहा कि पुलिस के जवानों का मनोबल गिराने वाला कोई निर्णय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

दरअसल पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के एडीजी (स्थापना) पीयूष आनंद के एक आदेश से हड़कंप मच गया. करीब 900 पुलिसकर्मियों को जिला पुलिस से वापस पीएसी में भेज दिया गया. इससे आर्म्ड पुलिस से सिविल पुलिस में गए सिपाहियों का डिमोशन हो गया. इसमें हेड कांस्टेबल, 6 सब इंस्पेक्टर को कॉन्स्टेबल बनाया दिया गया. बीते 20 सालों में ये सभी पीएसी से सिविल पुलिस में गए थे. पीएसी में कॉन्स्टेबल के पद से ये सभी सिविल पुलिस में गए थे.

सिविल पुलिस में प्रमोशन पाकर ये हेडकॉन्स्टेबल, सब इंस्पेक्टर बन गए थे. हालांकि मामले में एडीजी स्थापना ने दावा किया था कि किसी भी कर्मचारी का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. अपने बैच के मुताबिक सभी पुलिसकर्मियों को सीनियॉरिटी मिलेगी.



लेकिन इस निर्णय से शासन तक बवाल मच गया. शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए डीजीपी को निर्देश दिए कि इन सभी 900 जवानों को तुरंत प्रमोशन किया जाए.
हाईकोर्ट में भी दाखिल हो चुकी है याचिका

वैसे बता दें इस निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी चुनौती दी जा चुकी है. याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं. याचिकाकर्ता हेड कांस्टेबल पारसनाथ पांडेय व अन्य का कहना है कि 20 वर्ष की सेवा के बाद सिविल पुलिस से पीएसी में वापस भेजना शासनादेश के विरुद्ध है. बिना सुनवाई का मौका दिए पदावनति देकर तबादला करना नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है. याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं. मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी.

याचिका में कहा गया है कि 9 सितंबर और 10 सितंबर 2020 को पारित डीआइजी स्थापना, पुलिस मुख्यालय व अपर पुलिस महानिदेशक पुलिस मुख्यालय के आदेशों से पदावनति देकर याचियों का तबादला कर दिया गया. प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 896 हेड कांस्टेबलों को पदावनत करके कांस्टेबल बना दिया गया है. साथ ही उन्हें पीएसी में स्थानांतरित कर दिया गया है. मामले में सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता ने शासन से जानकारी लेने के लिए कोर्ट से 3 दिन का समय मांगा है. वहीं, याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता कोर्ट से पदावनति आदेश पर रोक लगाने की मांग की है.

ये है पूरा मामला

दरअसल सिर्फ ड्यूटी के लिए सिविल पुलिस में भेजे गए 932 पीएसी जवानों को जुगाड़ और सेटिंग से पुलिस के कोटे में ही प्रमोशन दे डाला. पीएसी के ही एक जवान ने हाई कोर्ट में याचिका डाली तो मामला खुला. इन 932 में से 14 रिटायर हो चुके हें. बाकी 896 के प्रमोशन निरस्त कर 22 आरक्षी समेत सभी को मूल संवर्ग पीएसी में आरक्षी के पद पर वापस कर दिया गया है.

दरअसल, उत्तर प्रदेश में पीएसी के आरक्षी जितेंद्र कुमार ने अपना प्रमोशन नागरिक पुलिस में मुख्य आरक्षी पद पर न होने पर हाई कोर्ट में 2019 में याचिका डाली. मामले में प्रमोशन पाए पीएसी के ही सुनील कुमार यादव, दिनेश कुमार चौहान और देव कुमार सिंह का उल्लेख किया गया. मामले में डीजीपी ने 4 सदस्यीय समिति बनाकर जांच कराई तो रिपोर्ट में सारा खेल उजागर हो गया.
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