NCERT की किताबों को लेकर मारामारी, विशेष काउंटर भी नहीं कर पा रहे मांग पूरी

न्यूज 18 यूपी की टीम ने जब उन कॉलेजों का निरीक्षण किया, जहां बुक स्टॉल्स लगाए गए थे तो अभिभावक और छात्र परेशान नजर आए. बुक स्टॉल्स पर जरूरत से कम किताबें ही रखी गई थीं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 17, 2018, 4:49 PM IST
NCERT की किताबों को लेकर मारामारी, विशेष काउंटर भी नहीं कर पा रहे मांग पूरी
एनसीईआरटी किताबों को लेकर मारामारी
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Updated: April 17, 2018, 4:49 PM IST
यूपी बोर्ड के छात्रों को एनसीईआरटी सिलेबस की किताबें मिल सकें, इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूल-कॉलेजों में किताबों के काउंटर लगाने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत राजधानी में पहले दिन 4 कॉलेजों में काउंटर भी लगाए गए. लेकिन अधूरी तैयारियों के चलते छात्रों और अभिभावकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

न्यूज 18 यूपी की टीम ने जब उन कॉलेजों का निरीक्षण किया, जहां बुक स्टॉल्स लगाए गए थे तो अभिभावक और छात्र परेशान नजर आए. बुक स्टॉल्स पर जरूरत से कम किताबें ही रखी गई थीं. इसके अलावा इंग्लिश मीडियम की किताबें न होने से भी छात्र और अभिभावक परेशान होकर खाली हाथ वापस लौटे. इतना ही नहीं किताबें लेने के लिए छात्रों को अपने कॉलेज में क्लासेज बंक करके इन बुक स्टॉल्स पर आना पड़ा. कई स्कूलों ने तो अपने यहां के सभी छात्रों की किताबें इकठ्ठा खरीदने के लिए अपने प्रतिनिधियों को यहां भेजा. लेकिन इन बुक स्टॉल्स पर इतनी किताबें ही उपलब्ध नहीं थीं.

राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में भी अव्यवस्था का आलम नजर आया. छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग लाइन तक नहीं थी. धक्का-मुक्की के बीच छात्रों और अभिभावकों को किताबें खरीदनी पड़ी. दरअसल माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस साल से यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी सिलेबस पर आधारित कोर्स तो लागू कर दिया लेकिन उसकी अधूरी तैयारी अब छात्रों और शिक्षकों को भारी पड़ रही है. नया सत्र शुरू हुए 15 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी भी छात्र बिना किताबों के पढ़ने को मजबूर हैं.

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कक्षा 9 से 12 तक में कुल 31 किताबों को एनसीईआरटी के सिलेबस पर आधारित किया है. 4 प्रकाशकों को यह किताबें छापने की जिम्मेदारी दी गई. किताबें छप तो गई लेकिन अभी तक पूरी तरह से बाजार में नजर नहीं आ रही हें. इतना ही नहीं इस पूरी योजना में जो बड़ी खामी अब सामने आ रही है वह इंग्लिश मीडियम की किताबें न छपवाना है. असल में विभाग ने सिर्फ हिंदी मीडियम की किताबें ही छपवाई हैं. इसका असर स्कूलों में साफ नजर आ रहा है. इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को तो बिलकुल भी किताबें नहीं मिल पा रही हैं.

न्यूज 18 यूपी की टीम जब स्कूलों में पहुंची तो क्लास में पढ़ाने वाले टीचर और पढ़ने वाले छात्र दोनों ही किताबों के बिना नजर आए. इसकी वजह से छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. असल में बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यूपी बोर्ड में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या कम है. इसीलिए सिर्फ हिंदी मीडियम की किताबें छपवाई गई हैं. अधिकारियों के अनुसार इंग्लिश मीडियम के छात्र सीबीएसई के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाले एनसीईआरटी की इंग्लिश की किताबों से पढ़ सकते हैं.

उधर किताब विक्रेता कहते हैं कि सिर्फ सीबीएसई के स्कूलों की बात करें तो जरूरत के मुकाबले 30 परसेंट के करीब ही एनसीईआरटी की किताबें मिल पा रही हैं. यूपी बोर्ड के छात्र बढ़ने से दिक्कत और ज्यादा है. अधिकतर छात्रों को दुकान से खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है.

(रिपोर्ट: शैलेश अरोड़ा)
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