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    चुनाव बिहार में, तो फिर यूपी के अफसरों की क्यों उड़ी है नींद? जानिए वजह

    शराब की पेटियां बरामद
    शराब की पेटियां बरामद

    Bihar Assembly Election: बिहार में शराबबंदी है मगर विधानसभा चुनाव में इसकी भारी मांग. ऐसे में यूपी के सीमावर्ती जिलों से शराब (Liquor) की खेप बिहार तक न पहुंच सके, इसके लिए आबकारी विभाग के अफसर दिन-रात जूझ रहे हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 1, 2020, 10:36 AM IST
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    लखनऊ. चुनाव की गहमागहमी बिहार (Bihar Assembly Election 2020) में मची है लेकिन, उसके शोर से यूपी के सैकड़ों अफसरों की नींद उड़ी हुई है. जब तक बिहार में मतदान खत्म नहीं हो जाता तब तक ऐसे अफसरों को चैन नसीब नहीं होगा. आखिर क्यों? जवाब है शराब (Liquor). बिहार में शराबबंदी है और चुनाव में इसकी भारी मांग. ऐसे में यूपी के सीमावर्ती जिलों से शराब की खेप बिहार तक न पहुंच सके, इसके लिए आबकारी विभाग के अफसर दिन-रात जूझ रहे हैं. जिला आबकारी अधिकारियों को तो दोधारी तलवार पर चलना पड़ा रहा है. जिस जिले की शराब बिहार में पकड़ी जा रही है वहां के अफसरों की दीवाली काली हो जा रही है. दो दुकानें पर कार्रवाई पिछले हफ्ते हो चुकी है.

    10 जिलों की सीमाएं यूपी से लगी
    यूपी के आबकारी विभाग में इन दिनों खलबली मची हुई है. जद्दोजहद इस बात की कि बिहार चुनाव में यूपी की शराब का इस्तेमाल वोट झटकने के लिए न हो. इसीलिए लगभग 18 जिलों में सख्ती जारी है. यही वजह है कि इन जिलों में पिछले महीनों के मुकाबले इस महीने ज्यादा शराब पकड़ी जा रही है. बता दें कि बिहार के 10 जिलों कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, गया, औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज और पश्चिमी चम्पारण की सीमा यूपी से लगती है. यूपी के सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज की सीमा बिहार से लगती है.

    कैसे रुकेगी शराब की तस्करी

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