उपचुनाव को लेकर BJP ने क्यों झोंक रखी है पूरी ताकत? सत्ता विरोधी लहर का डर या फिर...

विधानसभा के उपचुनाव के लिए भाजपा जमकर प्रचार कर रही है.
विधानसभा के उपचुनाव के लिए भाजपा जमकर प्रचार कर रही है.

उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 8 सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव (Assembly By-election)होने हैं. परम्परागत रूप से ये माना जाता रहा है कि उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी का पलड़ा भारी रहता है. फिर सत्ताधारी भाजपा ने इन उपचुनावों के लिए इतनी ताकत क्यों झोंक रखी है. आखिर किसी बात का उसे डर है या फिर ये चुनाव लड़ने की उसकी प्रवृति है?

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लखनऊ. उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की जिन आठ विधानसभा की सीटों पर उपचुनाव (Assembly By-election) होने जा रहे हैं उन सभी जगहों पर भाजपा (BJP) ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. अभी न तो डेट का पता है और ना ही कैंडिडेट का, लेकिन फिर भी कई कई मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी लगातार दौरे और मीटिंग कर रहे हैं. यहां तक कि चुनाव वाले जिलों में धड़ाधड़ योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया जा रहा है. हालांकि दूसरी पार्टियों की कोई खास तैयारी अभी तक देखने को नहीं मिल रही है. आखिर इस विरोधाभास के पीछे क्या कारण है कि जिनके पक्ष में चुनाव झुका हुआ हो वो ज्यादा हाथ-पैर मार रहे हैं.

सीएम योगी आदित्यनाथ को साबित करनी है ये बात
यूपी में लम्बे समय से रिपोर्टिंग कर रहे वरिष्ठ पत्रकार उमर रशीद ने इसके कई कारण गिनाए. उमर ने बताया कि विधानसभा चुनाव से ऐन पहले होने वाले इस उपचुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ को ये साबित करना है कि उनके चेहरे और काम पर भी लोगों का भरोसा है. इतनी बेचैनी इसलिए भी क्योंकि योगी के चेहरे पर यूपी में अभी चुनाव नहीं हुए हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में उनका चेहरा सामने नहीं था. 2019 का लोकसभा चुनाव पीएम नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर लड़ा गया. वैसे तो 2019 में भी विधानसभा के उपचुनाव हुए थे लेकिन तब भी पार्टी का कद सीएम के चेहरे पर भारी था. दूसरी तरफ उनके शासनकाल में भाजपा गोरखपुर और फूलपुर की सीट पार्टी हार गयी थी. ऐसा पहली बार है जब पीएम मोदी के चेहरे के बिना चुनाव होने जा रहे हैं. योगी आदित्यनाथ किसी भी सूरत में ये नहीं चाहेंगे कि जो सीटें भाजपा के पास थीं उनमें कोई कमी आये. बढ़ जाये तो ही बेहतर. उनके लिए समस्या ये भी है कि यदि एक भी सीट पार्टी ने गंवाई तो विपक्षियों के लिए सरकार के प्रति एंटी इनकम्बेन्सी का बड़ा मुद्दा खड़ा करना आसान हो जायेगा. जिन 8 सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें से 6 भाजपा और 2 सपा के पास हैं.

यूपी में जिन 8 सीटों पर उपचुनाव होने हैं वे सीटें हैं - रामपुर की स्वार, कानपुर की घाटमपुर, जौनपुर की मल्हनी, अमरोहा की नौगांव सादात, उन्नाव की बांगरमऊ, देवरिया, फिरोजाबाद की टूण्डला और बुलंदशहर.

भाजपा ने कही ये बात


दूसरी तरफ भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि पार्टी किसी भी चुनाव को लेकर हल्के मूड में नहीं रहती. उसकी मेहनत के पीछे किसी तरह के भय का तो कोई सवाल ही नहीं बल्कि हर चुनाव लड़ने का उसका यही तरीका होता है. पिछले तीन सालों में योगी सरकार ने जो काम किया है और खासकर कोविड से लड़ाई में, उससे जनता के बीच सरकार के प्रति जबरदस्त जन समर्थन है. जौनपुर की मल्हनी और रामपुर की स्वार सीट पार्टी के पास नहीं है, लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत लगायी है कि इस सीट पर भी कमल का फूल खिल सके.

सीएम योगी आदित्यनाथ भी करेंगे प्रचार
भाजपा के सूत्रों ने न्यूज़ 18 को बताया है कि 8 सीटों पर होने वाले उपचुनाव वाले जिलों में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ भी जाएंगे. बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने तीन अहम लोगों को हर सीट पर उपचुनाव के लिए लगाया है. हर सीट के लिए दो लोगों को प्रभारी बनाया गया है. इनमें से एक सरकार के मंत्री और दूसरे संगठन के पदाधिकारी. हर जिले का एक प्रभारी मंत्री अलग से है ही. ऐसे में हर सीट पर तीन लोगों को जिम्मेदारी दी गयी है.

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