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'No One Killed' कृष्णानंद राय! इन वजहों से बरी हुए मुख़्तार अंसारी और अन्य आरोपी

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 4, 2019, 12:12 PM IST
'No One Killed' कृष्णानंद राय! इन वजहों से बरी हुए मुख़्तार अंसारी और अन्य आरोपी
फाइल फोटो

विधायक कृष्णानंद राय के वकील रहे रामाधार राय के मुताबिक इसकी कई वजह रहीं कि कातिलों का पता नहीं चल पाया और सभी आरोपी बरी हो गए.

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यूपी की सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांड में दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी, उसके सांसद भाई अफजाल अंसारी व अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. 14 साल की सुनवाई के बाद तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके 6 साथियों की निर्मम हत्या का राज भी दफ़न हो गया. आखिर क्या वजह थी कि सभी मुख्य आरोपी बरी हो गए.

विधायक कृष्णानंद राय के वकील रहे रामाधार राय के मुताबिक इसकी कई वजह रहीं कि कातिलों का पता नहीं चल पाया और सभी आरोपी बरी हो गए. उनका कहना है कि मुख्य गवाहों के मुकरने और गवाही न देने की वजह से केस कमजोर हुआ. वह कहते हैं कि मामले के अहम गवाह गाजीपुर की जमानिया तहसील के संजीव राय और मुन्ना राय ने गवाही नहीं दी. इसके अलावा हत्याकांड में जिंदा बचे शशिकांत राय और प्रत्यक्षदर्शी मनोज गौड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने भी केस को कमजोर किया.

मुख़्तार की आवाज का टेस्ट न होना
रामाधार राय कहते हैं मुख़्तार अंसारी की फ़ैजाबाद जेल में बंद बाहुबली अभय सिंह से मोबाइल फोन पर हत्याकांड को लेकर बातचीत हुई थी. इसके साक्ष्य भी हासिल हुए थे. साक्ष्य को साबित करने के लिए मुख़्तार की आवाज का टेस्ट कराने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन कोर्ट ने अर्जी ख़ारिज कर दी. इसका भी लाभ आरोपितों को मिला और दोष साबित नहीं हो सका.

जज बोले- गवाह न मुकरते तो फैसला कुछ और होता
मामले में फैसला सुनाते हुए स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने हत्याकांड को भयानक करार दिया. उन्होंने फैसले में लिखा कि इस केस की जांच यूपी पुलिस से लेकर सीबीआई को दी गई थी. कृष्णानंद की पत्नी अलका राय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में केस गाजीपुर से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था, लेकिन दुर्भाग्य से गवाहों के मुकर जाने से यह मामला भी अभियोजन की नाकामी का उदाहरण बन गया. यदि गवाहों को ट्रायल के दौरान विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, 2018 का लाभ मिलता तो नतीजा कुछ और हो सकता था.

इन्हें किया गया था नामजद
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पुलिस और सीबीआई ने इस मामले में अंसारी बंधुओं के अलावा संजीव माहेश्वरी जीवा, मुन्ना बजरंगी, एजाज, अता उर रहमान, फिरदौस, राकेश पाण्डेय, रामू मल्लाह, विश्वास नेपाली, जफर, अफरोज खान और मंसूर अंसारी के खिलाफ छह अलग-अलग चार्जशीट दायर की थीं. फिरदौस की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई. मुन्ना बजरंगी की नौ जुलाई, 2018 को बागपत जेल में हत्या कर दी गई. विश्वास नेपाली और जफर आज तक पकड़े नहीं गए हैं, जबकि अफरोज उर्फ चुन्नू पहलवान के खिलाफ यह केस बंद किया जा चुका है.

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First published: July 4, 2019, 11:22 AM IST
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