बलिया गोलीकांड: बीजेपी MLA सुरेंद्र सिंह को पार्टी ने किया तलब, बड़ी कार्रवाई की तैयारी

बीजेपी MLA सुरेंद्र सिंह को पार्टी ने किया तलब (file photo)
बीजेपी MLA सुरेंद्र सिंह को पार्टी ने किया तलब (file photo)

सुरेंद्र सिंह परिवार वालों के साथ रोए भी थे, जिसका वीडियो वायरल हुआ था. इसके बाद बीजेपी (BJP) पर खुलकर आरोपी का साथ देने का आरोप भी लग रहा है.

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  • Last Updated: October 18, 2020, 1:07 PM IST
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बलिया. उत्तर प्रदेश के बलिया (Ballia) में कोटे की दुकान के आवंटन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बुलाई गई खुली बैठक में एक शख्स की गोली मारकर हत्या (Shot Dead) मामले में बवाल मचा हुआ है. इसी बीच बैरिया से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह (BJP MLA Surendra Singh) को आरोपी के समर्थन में उतरना उनके लिए महंगा साबित हो सकता है. मामले को लेकर रविवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने बैरिया से विधायक सुरेंद्र सिंह को समन भेजा है. प्रदेश अध्यक्ष ने बलिया हत्याकांड मामले में बीजेपी नेता के बयान को लेकर उन्हें समन भेजा है. बताया जा रहा है कि विधायक सुरेंद्र सिंह को अपनी सफाई देने के लिए बुलाया गया है.

बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बलिया कांड के आरोपी धीरेंद्र सिंह के पक्ष में परिवार के साथ जाकर पुलिस से मुलाकात की थी. सुरेंद्र सिंह परिवार वालों के साथ रोए भी थे, जिसका वीडियो वायरल हुआ था. इसके बाद बीजेपी पर खुलकर आरोपी का साथ देने का आरोप भी लग रहा है. 17 अक्टूबर की सुबह विधायक सुरेंद्र सिंह रेवती थाना में दूसरे पक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे. इस दौरान बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि इंसाफ की लड़ाई में हम बिल्कुल अकेले हैं. उन्होंने कहा कि मैं झूठ नहीं बोलता. धीरेंद्र सिंह बीजेपी का सहयोगी रहा है. हालांकि, उन्‍होंने गोलीकांड को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

ये है पूरा मामला
बलिया जिले की ग्राम सभा दुर्जनपुर व हनुमानगंज की कोटे की दो दुकानों के आवंटन के लिए गुरुवार दोपहर को पंचायत भवन में खुली बैठक का आयोजन किया गया था. इसमें एसडीएम बैरिया सुरेश पाल, सीओ बैरिया चंद्रकेश सिंह और बीडीओ बैरिया गजेंद्र प्रताप सिंह के साथ ही रेवती थाने की पुलिस फोर्स मौजूद थी. दुकानों के लिए चार स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन किया, जिसमे दो समूहों मां सायर जगदंबा स्वयं सहायता समूह और शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह के बीच मतदान कराने का निर्णय लिया गया.
अधिकारियों ने कहा कि वोटिंग वहीं करेगा जिसके पास आधार अथवा अन्य कोई पहचान पत्र होगा. एक पक्ष के पास आधार व पहचान पत्र मौजूद था, लेकिन दूसरे पक्ष के पास कोई आईडी प्रूफ नहीं था. इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया. मामला बिगड़ता देख बैठक की कार्रवाई को स्थगित कर अधिकारी चले गए. इस बीच दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई. आरोप है कि धीरेंद्र ने अपनी पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें जयप्रकाश उर्फ गामा पाल की गोली लगने से मौत हो गई.
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