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BJP: 70 प्लस के नेताओं को टिकट देने का नियम बदला, आडवाणी, जोशी पर होगा असर

सांकेतिक तस्वीर.

सांकेतिक तस्वीर.

बता दें कि उत्तर प्रदेश में बढ़ता सीटों का आंकड़ा ही भारतीय जनता पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया था. 1984 की कांग्रेस लहर म ...अधिक पढ़ें

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिशन 2019 फतह करने से पहले काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. इसकी सबसे बड़ी चुनौती टिकट बंटवारा है. सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने मंत्रिमंडल में 75 प्लस के फार्मूले के आधार पर वरिष्ठ नेताओं को नहीं रखा, लेकिन टिकट काटने में ये फार्मूला लागू नहीं किया जा रहा है.

    सुनिश्चित जीत वाले 70 प्लस के नेताओं को भाजपा टिकट देगी. शायद यही कारण है कि देवरिया और कानपुर जैसी सीटों पर पार्टी चुप्पी साधे हुए है, जबकि रामपुर और मेरठ सीट पर प्रत्याशी बदलने की चर्चाएं गरमा रही हैं. वहीं लाल कृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशीऔर कलराज मिश्रा जैसे कई दिग्गज नेता 70 प्लस की लिस्ट में शामिल हैं.

    बीजेपी को यूपी से इस बार भी उम्मीदें हैं और पार्टी नेतृत्व कोई भी ऐसा संदेश नहीं देना चाहता, जिससे वरिष्ठ नेताओं के चेहरे पर शिकन दिखे. दूसरी तरफ गठबंधन की राजनीति में जातीय समीकरण साधना बीजेपी की भी मजबूरी है और ऐसे में बीजेपी के सियासी समीकरण में 70 प्लस वाले नेता अगर फिट बैठते हैं तो टिकट उनका नहीं कटेगा.

    ये रहा आंकड़ा
    बता दें कि उत्तर प्रदेश में बढ़ता सीटों का आंकड़ा ही भारतीय जनता पार्टी को सत्ता तक पहुंचाएगा. 1984 की कांग्रेस लहर में बीजेपी उत्तर प्रदेश में खाता भी नहीं खोल पाई थी, वहीं 1989 में बीजेपी को देश में 89 सीटें मिली तो उसमें से 8 सीटें उत्तर प्रदेश से थीं. 1991 में बीजेपी को कुल 120 सीटें मिलीं जिसमें से 51 सीटें यूपी से रहीं. 1996 में ये संख्या 161 तक पहुंची और यूपी की भागीदारी 52 तक पहुंच गईं और बीजेपी का सत्ता में प्रवेश भी हुआ, भले ही वो सरकार तेरह दिन में चली गई.

    1998 में ये आंकड़ा 181 पहुंचा जिसमें यूपी का आंकड़ा 57 पहुंचा और फिर बीजेपी को सत्ता का तेरह महीने का सुख मिला. 1999 में देश में बीजेपी को 182 सीटें मिलीं लेकिन यूपी में सीटों की संख्या घटकर 29 हो गई. बीजेपी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार चलाई. 2004 में भाजपा यूपी से मात्र 10 सीटें जीत पाई और सत्ता से बाहर हो गई. 2014 में मोदी करिश्मा छा गया और पीएम नरेंद्र मोदी खुद वाराणसी से चुनाव लड़े और यूपी ने रिकार्ड तोड़ सीटें भाजपा को दीं.

    ‘मोदी है तो मुमकिन है’
    बीजेपी का कहना है कि प्रत्याशी चयन एक प्रक्रिया है और बीजेपी उसी प्रकिया के तहत अपनी तैयारी कर रही है. वहीं, बीजेपी एक बार फिर, 'मोदी है तो मुमकिन है' के नारे के साथ मैदान में उतर रही है. ऐसे में स्थानीय प्रतिनिधियों से जनता की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, साथ ही यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि जनता अगर अपने प्रतिनिधि से खुश नहीं है तो उन्हें बदल दिया जाएगा.

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    Tags: Amit shah, Ayodhya, BJP, Lok Sabha Election 2019, Pm narendra modi, RSS, UP police, Uttar pradesh news, Uttar Pradesh Politics, VHP, Yogi adityanath

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