Lockdown: यूपी बीजेपी ने बूथ अध्यक्षों से जाना कोरोना काल की जमीनी हकीकत
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Lockdown: यूपी बीजेपी ने बूथ अध्यक्षों से जाना कोरोना काल की जमीनी हकीकत
भारतीय जनता पार्टी की कोशिश दिग्विजय सिंह को मुद्दा बनाने की है. (file photo)

संगठनात्मक स्तर पर पश्चिम और ब्रज क्षेत्र के बूथ अध्यक्षों से संपर्क करने की जिम्मेदारी महामंत्री विजयबहादुर पाठक (Vijay Bahadur Pathak) को दी गई थी, वहीं कानपुर और अवध क्षेत्र की जिम्मेदारी गोविंद नारायण शुक्ल को दी गई थी.

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लखनऊ. पूरा देश कोरोना (Coronavirus) के खात्मे की लड़ाई में जुटा हुआ है. आम हो या खास, सभी लोग अपने-अपने तरीके से इस जंग में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. इसी क्रम में कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के बीच बीजेपी प्रदेश पदाधिकारियों ने प्रदेश भर के 1.45 लाख बूथ अध्यक्षों से फीडबैक लेने का कार्य पूरा कर लिया. अभियान में बूथ अध्यक्षों के हालचाल पूछने से लेकर श्रमिकों, कामगारों, जरुरतमंदों के लिए किए जा रहे कार्यों पर भी चर्चा हुई. संगठनात्मक स्तर पर पश्चिम और ब्रज क्षेत्र के बूथ अध्यक्षों से संपर्क करने की जिम्मेदारी महामंत्री विजयबहादुर पाठक को दी गई थी, वहीं कानपुर और अवध क्षेत्र की जिम्मेदारी गोविंद नारायण शुक्ल को दी गई थी.

प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर के पास काशी और गोरखपुर के बूथ अध्यक्षों से संपर्क की जिम्मेदारी थी. कैसा रहा संपर्क के सवाल पर बीजेपी महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि इस लक्ष्य को 14 मई तक पूरा करना था, लेकिन प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र शुक्ला के निधन के चलते एक दिन बढ़ गया. 15 मई को संपर्क अभियान खत्म हुआ है. उन्होंने कहा कि बूथ अध्यक्षों के बीच काफी उत्साह था. जहां पर भी कुछ समस्याएं आईं उसे जिलाध्यक्षों के माध्यम से हल करा लिया गया.

प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाएं जमीन पर पहुंच रही हैं. बूथ अध्यक्ष आमजन की समस्याओं को हल करने में आगे बढ़कर मदद कर रहे हैं. उनका रिस्पांस काफी अच्छा है और संगठन को अच्छा फीडबैक मिला है. बूथ अध्यक्ष पार्टी की प्राथमिक इकाई हैं और इस अभियान से बूथ कमेटियों को सक्रिय रखने में सहायता मिलेगा.



दरअसल यूपी की ग्राम पंचायतों के मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है. हालांकि कोरोना के चलते चुनावों में देरी भी हो सकती है, लेकिन बीजेपी ने जिसतरह से बूथ अध्यक्षों से संपर्क का कार्यक्रम चलाया है. उसे पंचायत चुनाव के नजरिए से देखा जा सकता है और साथ ही बूथ अध्यक्षों से मिला फीडबैक मिशन 2022 की रणनीति तैयार करने में भी कारगर होगा.
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