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OPINION: लखनऊ शूटआउट से नहीं लिया सबक तो BJP को अदा करनी होगी बड़ी कीमत

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ फाइल फोटो

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं​ कि लखनऊ की घटना ने सरकार की छवि को तगड़ी चोट पहुंचाई है. अगर बीजेपी सरकार ने इस घटना से सबक नहीं लिया, तो चुनावों में उसे इसकी भारी कीमत अदा करनी पड़ सकती है.

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लखनऊ में विवेक तिवारी हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ज्यादतियों और उत्पीड़न की घटनाओं पर पहले से चल रही चर्चा को जोरदार हवा दी है. इसी का असर है कि योगी सरकार अब बैकफुट पर नजर आ रही है. मामले को शांत करने के लिए सरकार की तरफ से एसआईटी के गठन और ज्यूडिशियल इंक्वायरी के जरिए ​निष्पक्ष जांच के दावे किए जा रहे हैं. भारी दबाव के बीच मृतक विवेक की पत्नी को मुआवजे और सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की गई है.

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बहरहाल, ​इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत को भी झकझोर कर रख दिया है. प्रमुख विपक्षी दल लगातार योगी सरकार पर हमलावर हैं. उधर, राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं​ कि लखनऊ की घटना ने सरकार की छवि को तगड़ी चोट पहुंचाई है. अगर बीजेपी सरकार ने इस घटना से सबक नहीं लिया तो चुनावों में उसे भारी कीमत अदा करनी पड़ सकती है.

विपक्ष की बात करें तो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर योगी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक आम आदमी की हत्या करके साबित कर दिया है कि बीजेपी सरकार में एनकाउंटर की हिंसात्मक संस्कृति कितनी विकृत हो गयी है. एक मल्टीनेशनल कम्पनी के एम्पलॉयी के मारे जाने से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की निगाह में भी प्रदेश की छवि विकृत हुई है.


एक अन्य ट्वीट में अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी सरकार को असंवेदनशील रवैया छोड़कर तत्काल मृतक की पत्नी के लिए सरकारी नौकरी व बच्चियों के भविष्य के लिए 5 करोड़ की आर्थिक मदद की लिखित घोषणा करनी चाहिए. परिवार की ज़िम्मेदारी क्या होती है, ये बात परिवारवाले ही जानते हैं. दुख की इस घड़ी में हम शोकाकुल परिवार के साथ खड़े हैं.

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उधर उत्तर प्रदेश कांग्रेस भी इस मामले में हमलावर है. प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने भी ट्वीट किया है. उन्होंने सीधे हमला करते हुए लिखा है कि मुख्यमंत्री को शर्म आनी चाहिए. लखनऊ में एक आम शहरी का एनकाउंटर कर दिया गया. मुख्यमंत्री ने पुलिस की वर्दी में गुंडों की फौज पाल रखी है. देश के गृहमंत्री के चुनाव क्षेत्र में भी आम आदमी सुरक्षित नहीं हैं. प्रवचनकर्ता प्रधानमंत्री विवेक तिवारी के परिवार को क्या जवाब देंगे?


दूसरे ट्वीट में राजबब्बर ने लिखा कि योगीजी मुख्यमंत्री भी हैं और राज्य के गृहमंत्री भी. लेकिन निर्दोष विवेक तिवारी के परिजनों के लिए उन्होंने अपनी यात्राएं रद्द नहीं कीं. हृदयहीनता के अपने चरम पर है योगी-मोदी राज. यूपी कांग्रेस ने हज़रतगंज में कैंडिल मार्च किया. विवेक को न्याय दिलाना अब सबसे अहम कार्य है.

वरिष्ठ पत्रकार विजय शर्मा कहते हैं कि लखनऊ का शूटआउट पुलिस उत्पीड़न की रोज होने वाली घटनाओं का चरम है. सच ये है कि आम आदमी रोज पुलिस के उत्पीड़न का शिकार होता है. सभी को पता है कि भ्रष्टाचार पुलिस में किस कदर लिप्त है? लेकिन विरोध के स्वर तभी सुनाई देते हैं, जब इस तरह की घटनाएं आती हैं. उन्होंने कहा कि जनता को भी अब जागरूक होना पड़ेगा. उसे रोज-रोज होने वाले पुलिस उत्पीड़न के ​खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी होगी. '100 रुपये देकर निकल लो', वाली सोच को छोड़ना होगा, क्योंकि गोलीकांड इन्हीं छोटे-छोटे पुलिस उत्पीड़न का भयावह रूप है.

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विजय शर्मा कहते हैं कि राजनीतिक नजरिए से देखें तो निश्चित तौर पर ये घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सरकार के लिए तगड़ा झटका है. कानून व्यवस्था को लेकर उनके जो भी प्रयास रहे हों, उन सभी प्रयासों पर ये अकेली घटना भारी पड़ती दिख रही है. अगर सरकार और बीजेपी ने इस घटना से सबक नहीं लिया और आगे भी इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो निश्चित तौर पर ये बीजेपी के नुकसानदायक होगा. कारण ये है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून व्यवस्था हमेशा से ही अहम मुद्दा रहा है.


वहीं वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि इस घटना ने पुलिस की बर्बरता और निरंकुशता को उजागर किया है. संदेह के आधार पर किसी को गोली नहीं मार सकते. उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी सरकार के लिए अहम मुद्दा होता है. लेकिन ये घटना बता रही है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था में वैसा सुधार नहीं हो रहा है, जिसकी उम्मीद बीजेपी के सत्ता में आने के बाद की जा रही थी. निरंकुश पुलिस कभी भी कानून व्यवस्था सुधार नहीं सकती. सरकार को इस मामले में कड़ी कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कोर्ट में भी उचित पैरवी कर उन्हें सजा दिलानी होगी. इस घटना से सरकार की छवि को काफी नुकसान हुआ है.

सुरेश बहादुर कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ये देखना होगा कि उनकी कानून व्यवस्था के मामले में गंभीरता और निर्देशों का पालन अफसर जमीन पर कैसे कर रहे हैं.

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