BKU लोकशक्ति किसान आंदोलन में लौटी, कार्यकर्ताओं से की गाजीपुर धरनास्थल पर पहुंचने की अपील

कृषि कानून का विरोध कर रहे किसानों के आंदोलन ने 26 जनवरी को हिंसक रूप ले लिया था. (फाइल फोटो)

कृषि कानून का विरोध कर रहे किसानों के आंदोलन ने 26 जनवरी को हिंसक रूप ले लिया था. (फाइल फोटो)

पार्टी अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं (Party Workers) को निर्देश दिया कि वे सभी गाजीपुर के धरनास्थल पर पहुंचें और जो मुजफ्फरनगर के आसपास हों वे मुजफ्फरनगर पहुंचें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:25 PM IST
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लखनऊ. भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति (BKU Lokshakti) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्योराज सिंह भाटी (National President Shioraj Singh Bhati) ने पार्टी कार्यकर्ताओं (Party Workers) को निर्देश दिया कि वे सभी गाजीपुर के धरनास्थल पर पहुंचें और जो मुजफ्फरनगर के आसपास हों वे मुजफ्फरनगर पहुंचें. आपको बता दें कि कल भारती किसान यूनियन लोकशक्ति ने गौतमबुद्धनगर में दलित प्रेरणा स्थल पर चल रहा पार्टी का धरन चार सूत्री मांगों के साथ खत्म कर दिया है.

गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने किसानों की मांगों को लेकर 4 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गौतमबुद्धनगर सांसद डॉ. महेश शर्मा भी उपस्थित रहे. ज्ञापन देने में भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्योराज सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव मलिक, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रताप नागर और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी विश्वास नागर उपस्थित थे.

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भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने सरकार से मांग की थी कि नए कृषि बिलों का क्रियान्वयन वांछित संशोधनों के बाद ही किया जाए. एमएसपी पर गारंटी कानून बनाया जाए. नए कृषि बिलों की संशोधन समिति में किसानों का पक्ष रखने के लिए कम से कम 1 सदस्य भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति का भी रखा जाए. 26 जनवरी के दिन में हुए उपद्रव के नाम पर पुलिस निर्दोष किसानों को परेशान न करे और भारत सरकार बड़ा दिल दिखाते हुए किसानों से नरमी से पेश आए.
गौरतलब है कि कल पुलिस और प्रशासन ने आंदोलनरत किसानों पर सख्ती दिखलाई थी. यूपी के एसडीएम ने किसानों को नोटिस थमाते हुए गाजीपुर बॉर्डर खाली करने का निर्देश दिया था. इसके अलावा किसान आंदोलन के कई नेताओं के ऊपर मामले दर्ज किए गए थे.
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