बड़ी खबर : योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, कानपुर और वाराणसी में लागू हुई कमिश्नरेट प्रणाली

मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवार शाम को कैबिनेट की अहम बैठक हुई.  (File Photo: सीएम योगी)

मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवार शाम को कैबिनेट की अहम बैठक हुई. (File Photo: सीएम योगी)

मुख्यमंत्री आवास पर शाम को हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया बड़ा फैसला, अब कानपुर देहात होगा कानपुर आउटर.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 6:57 PM IST
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लखनऊ. बड़ी खबर लखनऊ से है, यहां मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक (Cabinate Meeting) के दौरान कानपुर और वाराणसी में भी कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने को मंजूरी दे दी गई है. इस दौरान कानपुर नगर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया है और कानपुर देहात को आउटर बनाया गया है. ऐसा ही वाराणसी में भी हुआ है और वहां पर वाराणसी आउटर को ग्रामीण बनाया गया है. गौरतलब है कि पंचायत चुनावों की अधिसूचना से पहले ही योगी सरकार ने ये बड़ा फैसला कर लिया है.

वहीं दूसरी तरफ आईपीएस अधिकारियों की तबादला लिस्ट आने की उम्मीद है. सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद में डीआईजी/एसएसपी की तैनाती की जाएगी. नोएडा पुलिस कमिश्नरेट में भी बदलाव की चर्चा है. बताया जा रहा है कि आकाश कुलहरि, शलभ माथुर दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं.

चुनाव का खाका तैयार

बता दें सरकार ने 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने के लिए खाका तैयार कर लिया है. इसी क्रम में माना जा रहा है कि बोर्ड परीक्षाएं भी टल सकती हैं. आयोग की तरफ से सीएम योगी से इस संबंध में बोर्ड परीक्षाएं थोड़ा आगे बढ़ाने की गुजारिश भी की जा चुकी है. दरअसल हाईकोर्ट ने आयोग को चारों पदों के लए चुनाव 10 मई तक संपन्न करवाने के आदेश दिए हैं. 30 अप्रैल को मतदान होने के बाद माना जा रहा है कि मई के पहले हफ्ते तक मतगणना पूरी कर ली जाएगी.
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सुप्रीम कोर्ट में कल अहम सुनवाई

वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर दाखिल 186 पन्ने की याचिका पर 26 मार्च को सुनवाई होनी है. याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर जो आदेश दिया है उसे बदला जाये. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि 1995 को ही आधार वर्ष मानकर इस चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण किया जाये. उन्होंने कहा है कि सरकार ने फरवरी में ऐसा ही करने का शासनादेश जारी किया था. आरक्षण हो भी गया था, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और 2015 को आधार वर्ष मानकर सरकार को नये सिरे से आरक्षण के आदेश दे दिये.
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