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UP उपचुनाव में बसपा के 6 और कांग्रेस के 7 प्रत्याशियों की जमानत जब्त

Manish Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 25, 2019, 1:52 PM IST
UP उपचुनाव में बसपा के 6 और कांग्रेस के 7 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
रामपुर, लखनऊ कैंट, ज़ैदपुर, गोविंदनगर, गंगोह और प्रतापगढ़ ऐसी ही सीटें हैं, जहां बसपा अपनी जमानत नहीं बचा पायी. कांग्रेस का भी कुछ यही हाल है.

यूपी विधानसभा उपचुनाव 2019 (UP Assembly By Election 2019) 11 में से 6 सीटों पर बसपा (BSP) के उम्मीदवार बुरी तरह हारे हैं. वे अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये. इस मामले में बसपा का प्रदर्शन कांग्रेस (Congress) के बराबर आकर खड़ा हो गया है, जिसके 7 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है.

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लखनऊ. यूपी विधानसभा (UP Assembly) की 11 सीटों पर हुए उपचुनाव (By Election) में सबसे ज्यादा घाटा बीएसपी (BSP) को उठाना पड़ा है. उसने न सिर्फ अपनी एक सीटिंग सीट गंवा दी है बल्कि 11 में से 6 सीटों पर बसपा के उम्मीदवार बुरी तरह हारे हैं. वे अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये. इस मामले में बसपा का प्रदर्शन कांग्रेस (Congress) के बराबर आकर खड़ा हो गया है, जिसके 7 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है. 11 सीटों पर हुए उपचुनाव में सभी पार्टियों और निर्दलीयों को मिलाकर कुल 109 उम्मीद्वार खड़े हुए थे. इसमें से 82 उम्मीदवारों की ज़मानत जब्त (Deposit Seized) हुई है. ये बात उतनी हैरान करने वाली नहीं है, जितनी ये कि बसपा के 6 उम्मीद्वार जमानत खो बैठे. बता दें पहली बार उपचुनाव में बसपा मैदान में उतरी थी. वो यूपी में भाजपा के बाद नम्बर टू की पार्टी दिखना चाहती थी लेकिन उसके सपने चूर-चूर हो गये.

रामपुर, लखनऊ कैंट, ज़ैदपुर, गोविंदनगर, गंगोह और प्रतापगढ़ ऐसी ही सीटें हैं, जहां बसपा अपनी जमानत नहीं बचा पायी. जमानत बचाने के लिए कुल पड़े वैध वोटों का 16.66 फीसदी चाहिए होता है लेकिन, बसपा को रामपुर में 2.14 फीसदी, लखनऊ कैण्ट में 9.64 फीसदी, ज़ैदपुर में 8.21 फीसदी, गोविंद नगर में 4.52 फीसदी, गंगोह में 14.37 फीसदी और प्रतापगढ़ में 12.74 फीसदी वोटों से ही संतोष करना पड़ा. इतना ही नहीं बसपा सिर्फ 2 ही सीटों इगलास और जलालपुर में रनर-अप रही. बाकी जगहों पर उसके उम्मीद्वार बुरी तरह पिट गये.

जनाधार बढ़ाने वाली कांग्रेस ने 11 में से 7 सीटों पर गंवाई जमानत
जमानत खोने के मामले में कांग्रेस के उम्मीद्वार भी पीछे नहीं रहे. कांग्रेस ने 11 में से 7 सीटों पर जमानत गंवाई है. 2017 के चुनाव के मुकाबले इस उपचुनाव में पार्टी का वोट शेयर भले बढ़ा हो लेकिन, उसका प्रदर्शन खराब रहा है. 2017 के चुनाव में इन 11 सीटों में से 4 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीद्वार दूसरे नंबर पर थे. इस उपचुनाव में वे महज गंगोह और गोविंदनगर तक सिमट कर रह गये.

बीजेपी के हारे प्रत्याशियों ने बचाई जमानत, सपा को सिर्फ प्रतापगढ़ में नुकसान
इस मामले में भाजपा बहुत लकी रही है. पार्टी भले ही तीन सीटें हार गयी हो लेकिन, उसके किसी भी कैण्डिडेट की जमानत जब्त नहीं हुई है. सपा के कैंडिडेट 11 में से 8 सीटें हारे हैं, फिर भी वे प्रतापगढ़ को छोड़कर बाकी सभी सातों सीटों पर अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे हैं.

प्रतापगढ़ में विजेता अपना दल, बाकी सबकी जमानत जब्त
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11 सीटों में से प्रतापगढ़ एकलौती ऐसी सीट है, जहां भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) के विजेता राजकुमार पाल के सामने सभी पार्टियां फीकी पड़ गयी हैं. इस सीट पर किसी भी कैंडिडेट की जमानत नहीं बची है.

घोसी के सुधाकर सिंह के अलावा सभी निर्दलीय की जमानत जब्त
विधानसभा चुनाव में निर्दली उम्मीदवारों का भी काफी बोलबाला होता है लेकिन, इस उपचुनाव में वे भी औंधे मुंह गिरे हैं. घोसी से निर्दलीय सुधाकर सिंह के अलावा किसी भी निर्दलीय उम्मीद्वार की जमानत नहीं बची है. बता दें कि सुधाकर सिंह सपा के कैंडीडेट थे लेकिन. उनका पर्चा खारिज हो गया था, जिसकी वजह से उन्हें निर्दलीय मैदान में उतरना पड़ा था.

जमानत बचाने की ये है गणित
चुनाव में जमानत बचाने के लिए कुल पड़े वैध वोटों का 1/6 या 16.66 फीसदी वोट हासिल करना होता है. इससे कम वोट पाने वाले उम्मीद्वारों की जमानत चुनाव आयोग वापस नहीं करता. विधानसभा के चुनाव में सामान्य और ओबीसी कैंडीडेट को 10 हजार रूपये, जबकि एससी/एसटी कैंडीडेट को पांच हजार रूपये जमानत राशि के तौर पर जमा करना पड़ता है.

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First published: October 25, 2019, 1:50 PM IST
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