• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • Explained: पंजाब में एक दलित नेता के CM बनने पर मायावती के तेवर क्यों हुए तल्ख, जानें वजह

Explained: पंजाब में एक दलित नेता के CM बनने पर मायावती के तेवर क्यों हुए तल्ख, जानें वजह

पंजाब में दलित सीएम बनने पर तिलमिलाईं मायावती (File photo)

पंजाब में दलित सीएम बनने पर तिलमिलाईं मायावती (File photo)

BSP Leader Mayawati News: दरअसल, दलित वोट बैंक से कांग्रेस और बसपा का क्या रिश्ता रहा है. आंकड़े बताते हैं कि 1985 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ गिरता चला गया. 1985 में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 39 फीसदी था.

  • Share this:

लखनऊ. पंजाब (Punjab) में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने एक दलित चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को सीएम की कुर्सी पर बैठाया और इधर यूपी में मायावती (Mayawati) ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोल दिया. कांग्रेस और बसपा का दलित वोट बैंक से रिश्ता ही ऐसा है. एक का प्लस दूसरे का माइनस बन जाता है. दलित पहले कांग्रेस के साथ थे. जैसे जैसे उसका साथ छोड़ते गये, बसपा के साथ जुड़ते गए. इसीलिए कांग्रेस खत्म होती गयी और बसपा खिलती गयी. अब मायावती सशंकित रहती हैं कि कहीं दलित फिर से न कांग्रेस की ओर रुख कर लें. कांग्रेस की यही लालसा है कि उसका घर फिर से दलित बसा दें. झगड़ा इसी का है.

पंजाब और यूपी में अगले साल एक साथ विधानसभा चुनाव होने हैं. पंजाब में तो कांग्रेस ने दलित कार्ड चल दिया है लेकिन, इसे यूपी में भी खूब प्रचारित किया जाएगा. दलित वोट बैंक की गोलबंदी के लिए कांग्रेस पार्टी यूपी की अपनी रैलियों और सभाओं में भी इसे जोर जोर से बताएगी कि उसने एक दलित को सीएम बनाया. तो क्या उसके इस कदम से दलित वोटों का उसकी ओर खिंचाव हो पाएगा?

बसपा के लिए था टर्निंग प्वाइंट
दरअसल, दलित वोट बैंक से कांग्रेस और बसपा का क्या रिश्ता रहा है. आंकड़े बताते हैं कि 1985 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ गिरता चला गया. 1985 में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 39 फीसदी था. 1989 में ये गिरकर 29 फीसदी रह गया. 1991 में तो मात्र 18 फीसदी ही बचा. 1993 में और गिरकर 15 फीसदी पर आ टिका. यही वो चुनाव था जिसमें दलित वोटबैंक पूरी तरह कांग्रेस से टूटकर बसपा के खेमे में जा खड़ा हुआ. बसपा के आंकड़े देखिए. 1989 और 1991 के चुनाव में बसपा को मात्र 10 फीसदी वोट मिले थे लेकिन, 1993 में उसका वोट शेयर बढ़ गया. पार्टी को 28 फीसदी से ज्यादा वोट मिले. बसपा के लिए यही चुनाव टर्निंग प्वाइंट था.

दलितों के सहारे सीएम बनीं मायावती
इस चुनाव में दलित वोट बैंक कांग्रेस से पूरी तरह टूटकर बसपा के खेमे में आ चुका था. तब से लेकर आज तक बसपा गिरती हालत में भी 20 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करती रही है और कांग्रेस 10 फीसदी से कम (2012 के चुनाव को छोड़कर). बता दें कि इसी के बाद बसपा को सत्ता में आने का मौका हासिल हुआ. मायावती इसी वोट बैंक के सहारे चार बार सीएम बनीं. भले ही ये कहा जाए कि मायावती को सीएम बनाने में और भी कई समुदायों का वोट बैंक शामिल रहा है लेकिन, कोर वोट बैंक तो दलित समुदाय ही माना जाता है.

बसपा को भाजपा से ज्यादा कांग्रेस से खतरा
अब कांग्रेस बसपा से इस वोट बैंक की छीनाझपटी में लगी है. ऐसा होते देख मायावती भला चुप कैसे रह सकती हैं. उन्हें भी तो अपना घर बचाना है. लिहाजा वो भाजपा पर हमला बोलते-बोलते कांग्रेस को लपेटे में लेना नहीं भूलतीं. दलित वोट बैंक के खिसकने को लेकर उन्हें भाजपा से ज्यादा कांग्रेस से खतरा है. दलित कांग्रेस का पुराना वोट बैंक जो रहा है. यही वजह है कि पंजाब में कांग्रेस ने दलित चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया तो मायावती हमलावर हो उठीं. उन्हें डर है कि जो 1993 में हुआ कहीं उसका उल्टा न होने लगे.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज