अपना शहर चुनें

States

'BSP कार्यकर्ताओं का आनंद और आकाश को जीतना होगा भरोसा'

बसपा कार्यकर्ताओं का जीतना होगा भरोसा?
बसपा कार्यकर्ताओं का जीतना होगा भरोसा?

अनुभव चक ने कहा कि अभी तो पार्टी ने दोनों को कमान सौंपी है. अगर बसपा कार्यकर्ताओं के साथ आनंद और आकाश कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे. तो वह सरवाइव कर पाएंगे.

  • Share this:
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया. वहीं, भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्‍ट्रीय संयोजक) की जिम्मेदारी दी है. वहीं मायावती के इस फैसले के बाद पार्टी के कुछ पुराने नेताओं के कुछ अलग तर्क हैं. न्यूज18 से खास बातचीत में बसपा नेता और दलित चिंतक अनुभव चक ने बताया कि बसपा के अंदर आनंद कुमार और आकाश आनंद को लेकर कोई असंतोष नहीं है. दलित चिंतक ने बताया कि कुछ दिनों पार्टी ऑफिस के बाहर कुछ लोगों ने दोनों नेताओं का विरोध किया था, वे लोग बसपा से जुड़े हुए नहीं थे.

चक कहते हैं कि बसपा का वो कार्यकर्ता जो ग्राउंड लेवल पर काम कर रहा है. उसका क्या सोचना है? वो हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है. 2006 में मान्यवर कांशीराम के निधन के बाद सड़कों पर विरोध करने की परंपरा बिल्कुल खत्म हो गई है. बसपा नेता ने कहा कि गरीबों की आवाज बनकर आनंद और आकाश को सड़कों पर उतरना चाहिए. जिससे पिछड़े और दलितों को इंसाफ मिल सके.

दलित चिंतक अनुभव चक




कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहना होगा
अनुभव चक ने कहा कि अभी तो पार्टी ने दोनों को कमान सौंपी है. अगर बसपा कार्यकर्ताओं के साथ आनंद और आकाश कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे. तो वह सरवाइव कर पाएंगे. चक ने बताया कि अगर जिस दिन पार्टी के कार्यकर्ताओं को उनके नेतृत्व में कमी नजर आएगी तो कार्यकर्ता दूरी बना लेंगे. इसलिए उन्हें बसपा के कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना होगा.

मायावती ने हाल ही में दी है पिता-पुत्र को बड़ी जिम्मेदारी

बता दें कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था. बैठक के दौरान बसपा सुप्रीमो ने अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है. वहीं, भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्‍ट्रीय संयोजक) की जिम्मेदारी दी है. बीएसपी कार्यकर्ता राम जी गौतम को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाए गए हैं.

यूपी में विधानाभा चुनाव में लगभग ढाई साल का वक्त बचा है. ऐसे में मायावती को अंदाज़ा है कि बड़े दांव के लिए ये वक्त बहुत छोटा है. और इसीलिए उन्होंने अपनी तैयारियां अभी से शुरू कर दी है. ये तो खैर 2022 में ही पता लगेगा कि मायावती कितनी सफल होती हैं.

ये भी पढ़ें:

शामली में फिर छाया पलायन का मुद्दा, लिखा मकान बिकाऊ है?

पिछड़ी जातियों को आरक्षण देना सपा-बसपा के बस में नहीं: डिप्टी सीएम मौर्य

Analysis: OBC को आरक्षण देकर योगी सरकार ने बिगाड़ा सपा-बसपा का समीकरण!
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज