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... तो भीम आर्मी के चंद्रशेखर का जवाब है मायावती का भतीजा आकाश आनंद?

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 24, 2019, 3:31 PM IST
... तो भीम आर्मी के चंद्रशेखर का जवाब है मायावती का भतीजा आकाश आनंद?
भतीजे आकाश आनंद के साथ मायावती

आकाश आनंद को राजनीति में लाने का मन मायावती ने दो साल पहले ही बना लिया था. सहारनपुर जातीय हिंसा के दौरान जिस तरह से चंद्रशेखर का नाम आगे आया, मायावती यह समझ चुकी थीं कि आने वाले दिनों में वह उनके दलित वोट बैंक की राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती होंगे.

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भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाकर मायावती ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है. आकाश आनंद को जहां एक ओर मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं वह बसपा का युवा चेहरा भी होंगे. दरअसल, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के दलित युवाओं के बीच बढ़ते कद को देखते हुए मायावती को एक युवा चेहरे की तलाश थी. उन्होंने करीब दो साल पहले ही लंदन से मैनेजमेंट की डिग्री लेकर लौटे आकाश आनंद को राजनीति का ककहरा सिखाना भी शुरू कर दिया था. लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने इस बात के संकेत भी दे दिए थे कि वह आकाश को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देंगी.

दरअसल, आकाश आनंद को राजनीति में लाने का मन मायावती ने दो साल पहले ही बना लिया था. सहारनपुर जातीय हिंसा के दौरान जिस तरह से चंद्रशेखर का नाम आगे आया, मायावती यह समझ चुकी थीं कि आने वाले दिनों में वह उनके दलित वोट बैंक की राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती होंगे. यही वजह थी कि वर्ष 2017 में जब जातीय हिंसा के बाद वह शब्बीरपुर गांव पहुंचीं तो उनके साथ पहली बार आकाश आनंद भी नजर आए थे. उस वक्‍त भी आकाश आनंद को लेकर मीडिया में काफी खबरें छपी थीं.

चंद्रशेखर का बढ़ता कद मायावती के लिए खतरा
हालांकि, चंद्रशेखर बसपा प्रमुख मायावती को अपनी बुआ मानते हैं और उन्हें समर्थन की बात करते हैं. लेकिन, बसपा सुप्रीमो ऐसा नहीं मानतीं. वह लगातार चंद्रशेखर पर हमले करती रही हैं और उन्हें बीजेपी की 'बी' टीम बताती रही हैं. इतना ही नहीं मायावती ने चंद्रशेखर को समर्थन देने की जगह बसपा ज्वाइन कर कैडर के लिए काम करने की नसीहत भी दे डाली थी. राजनीति की माहिर मायावती यह भलीभांति जानती हैं कि चंद्रशेखर का जो क्रेज दलित युवाओं में देखने को मिल रहा है, उससे कहीं न कहीं बसपा के बेस वोट को ही खतरा है. अब आकाश आनंद को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देते हुए उन्हें चंद्रशेखर की पॉपुलैरिटी को कम करने के मिशन पर लगाया गया है.

 आनंद को लाने के पीछे तीन अहम वजह
वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं कि आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक बनाने के पीछे तीन अहम वजह हैं. पहली वजह तो यह है कि युवाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता. दूसरी वजह, सपा और कांग्रेस के युवा चेहरों की विफलता और तीसरा सबसे अहम कारण है पश्चिम उत्‍तर प्रदेश में चंद्रशेखर का उदय. मायावती आकाश आनंद के रूप में शहरी युवाओं को एक फ्रेश चेहरा देने की कोशिश कर रही हैं. उनकी कोशिश है कि अखिलेश और राहुल गांधी के फेल होने के बाद आकाश आनंद अगर युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं तो यूपी में वे बीजेपी को कुछ चुनौती दे सकती हैं. उधर, पश्चिम यूपी में जाटव और मुस्लिमों में भी चंद्रशेखर के प्रभाव की निष्क्रिय करने में उन्हें मदद मिलेगी.

अहम होगी आकाश आनंद की भूमिकाराष्ट्रीय समन्वयक के तौर पर आकाश आनंद की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पार्टी से युवाओं को जोड़ने की होगी. उन्हें राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी में ब्राह्मण चेहरा सतीश चंद्र मिश्रा और लोकसभा में बसपा के नेता व मुस्लिम चेहरा दानिश अली के साथ सभी वर्गों को पार्टी के विचारधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह भाईचारा कमेटी के माध्यम से पार्टी की विचारधार युवाओं तक पहुंचाएंगे. मायावती को लगता है कि 24 साल के आकाश आनंद पार्टी को सोशल मीडिया पर भी एक्टिव करने में महत्वपूर्ण रोल अदा करेंगे.

चंद्रशेखर दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन पर बढ़ रहे हैं आगे
दरअसल, पश्चिम यूपी में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर दलित और मुस्लिम कॉम्बिनेशन पर आगे बढ़ रहे हैं. वो दलितों और मुस्लिमों से जुड़े हर मुद्दे को उठा रहे हैं. चाहे वह अलवर गैंगरेप मामला हो या फिर गाजियाबाद में मस्जिद गिराने का मामला, चंद्रशेखर अपनी राजनीति को 'डीएम' फैक्टर के इर्द-गिर्द ही समेटे हुए हैं. इसी राजनीति पर मायावती भी आगे बढ़ती दिख रही हैं. लिहाजा चंद्रशेखर को वे प्रतिद्वंदी मानकर चल रही हैं.

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First published: June 24, 2019, 2:57 PM IST
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