जानिए क्या था स्टेट गेस्ट हाउस कांड और क्यों मायावती ने कहा- देशहित में भुलाया है

बता दें मायावती के जीवन पर लिखी गई अजय बोस की किताब में ‘गेस्ट हाउस कांड’ का तफ्तीश के साथ जिक्र किया गया है. बोस की किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक उस दिन बसपा के विधायक मायावती को अकेला छोड़कर भाग गए थे, लेकिन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी.

Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: January 12, 2019, 2:24 PM IST
जानिए क्या था स्टेट गेस्ट हाउस कांड और क्यों मायावती ने कहा- देशहित में भुलाया है
मायावती
Ajayendra Rajan
Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: January 12, 2019, 2:24 PM IST
सपा और बसपा के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर हुए गठबंधन के ऐलान के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी की चर्चित गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया. मायावती ने कहा कि देश व जनहित के लिए गेस्ट हाउस कांड को भूलकर चुनावी समझौता हम कर रहे हैं. आज भी उत्तर प्रदेश व देश की जनता बीजेपी से परेशान है और चुनावी वादों की नाकामी से सभी परेशान है. सर्वसमाज को आदर देते हुए हम चुनावी गठबंधन कर रहे हैं. 2019 के लिए यह नई राजनीतिक क्रांति होगी.

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बता दें उत्तर प्रदेश की सियासत में स्टेट गेस्ट हाऊस कांड काले अध्याय के रूप में पहचान रखता है. इस कांड ने उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच कड़वाहट पैदा कर दी थी जो 23 साल बाद अब करीब आए हैं.  दरअसल 2 जून 1995 को राजधानी लखनऊ के मीराबाई रोड स्थित गेस्ट हाउस में जो कुछ भी हुआ, वह देश की राजनीति के लिए किसी कलंक से कम नहीं था. उस दिन बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ न सिर्फ मारपीट हुई बल्कि उनके कपड़े फाड़कर उनकी आबरू लूटने की कोशिश भी की गई.

मायावती के जीवन पर लिखी गई अजय बोस की किताब में ‘गेस्ट हाउस कांड’ का तफ्तीश के साथ जिक्र किया गया है. बोस की किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक उस दिन बसपा के विधायक मायावती को अकेला छोड़कर भाग गए थे, लेकिन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी.

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दरअसल बाबरी विध्वंस के बाद 1993 यूपी में गठबंधन की राजनीति की नई पटकथा लिखी गई. मुलायम सिंह यादव और बसपा अध्यक्ष कांशीराम ने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन किया और जनता ने बहुमत दे दिया. मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी. लेकिन इसके बाद 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी. अचानक से हुए इस समर्थन वापसी की घोषणा से मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई.

उसके बाद राज्य सरकार के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं के उन्मादी भीड़ ने जो किया वह किसी कलंक से कम नहीं था. मायावती के जीवन पर आधारित किताब 'बहनजी' के मुताबिक भीड़ एक दलित महिला नेता को भद्दी-भद्दी गालियां दे रही थी. वहीं उनकी आबरू लूटने पर भी आमादा थी. आखिर उस दिन गेस्ट हाउस में क्या हुआ था वह आज भी लोगों के लिए कौतुहल का विषय है.
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अजय बोस की किताब के मुताबिक सरकार अल्पमत में आने के बाद सपा के नेता बहुमत की जुगाड़ में गोंट बैठाने में जुट गए. उस वक्त मायावती मीराबाई रोड स्थित गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में ठहरी हुई थीं. कहा जाता है कि बसपा विधायकों का जबरन समर्थन लेने के उद्देश्य से सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने गेस्ट हाउस पर हमला किया.

किताब के मुताबिक गाली-गलौज करते और शोर मचाते सपा समर्थकों ने गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया. सपा नेताओं ने मायावती को कमरे में बंद कर उनके साथ मारपीट की. उनके कपड़े फाड़ दिए. इन सब के बीच वहां मौजूद बसपा विधायक और नेता मायावती को बचाने की जगह वहां से फरार हो गए. ऐसे में मायावती की जान बचाने के लिए बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी पहुंचे. द्विवेदी ने दरवाजा तोड़कर मायावती को सुरक्षित बाहर निकाला.

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अजय बोस के मुताबिक सपा समर्थकों ने पांच बसपा विधायकों का अपहरण भी कर लिया और जबरन उनसे सादे कागज़ पर हस्ताक्षर करवाए. जब यह घटना हो रही थी उस दौरान तत्कालीन एसएसपी और मौजूदा डीजीपी ओपी सिंह पर एक्शन न लेने का भी आरोप लगा था.

किताब के मुताबिक जिस समय बसपा विधायकों को दबोचा जा रहा था, उस वक्त कमरा नंबर एक के बहार सपा समर्थक मायावती को जातिसूचक गालियां देते हुए मारने की धमकी दे रहे थे और दरवाजा पीट रहे थे. कुछ बसपा विधायकों का कहना था कि पूरे एक घंटे तक चले इस पागलपन के दौरान वहां मौजूद पुलिस और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे.

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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब हमला शुरू हुआ उसके ठीक बाद संदिग्ध परिस्थितियों में गेस्ट हाउस की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई. इस सबके बीच पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन और तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने बहादुरी का परिचय देते हुए मोर्चा संभाला और गेस्ट हाउस से उन लोगों को बाहर किया जो विधायक नहीं थे. इसके लिए लाठीचार्ज का भी सहारा लेना पड़ा. हालांकि सरकार की तरफ से विधायकों पर लाठीचार्ज के आदेश नहीं दिए गए थे.

इसके बाद राज्यपाल ऑफिस, केंद्र सरकार और बीजेपी विधायकों के दखल के बाद मामला काबू में आया. हालांकि सपा विधायकों पर लाठीचार्ज के लिए रात 11 बजे जिला मजिस्ट्रेट को ट्रान्सफर भी कर दिया गया.

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