लाइव टीवी

...तो इस बार भी BSP का सोशल इंजीनियरिंग पर दांव, SC के बाद सर्वाधिक सीटें ब्राह्मणों को

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: March 5, 2019, 1:02 PM IST
...तो इस बार भी BSP का सोशल इंजीनियरिंग पर दांव, SC के बाद सर्वाधिक सीटें ब्राह्मणों को
मायावती फाइल फोटो

सूत्रों के मुताबिक बसपा सुप्रीमो मायावती अपने कोटे के 38 सीटों में से आधी सीटों पर अनुसूचित जाति और ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट देगी.

  • Share this:
2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के सहारे सत्ता पर काबिज होने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती का यह प्रयोग आगामी लोकसभा चुनावों में भी बरकरार रहेगा. सपा के साथ गंठबंधन के बाद 38 सीटों पर चुनाव लड़ रही बसपा अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और मुसलामानों को टिकट बंटवारे में भागीदारी देकर बीजेपी और प्रियंका इफ़ेक्ट को कुंद करने की तैयारी में हैं.

सूत्रों के मुताबिक, बसपा सुप्रीमो मायावती अपने कोटे के 38 सीटों में से आधी सीटों पर अनुसूचित जाति और ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट देगी. इसके बाद शेष बचीं सीटें मुस्लिम व अन्य पिछड़ों के खाते में जा सकती है. दरअसल काफी मंथन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती इस निष्कर्ष पर पहुंची हैं कि चुनावों में जीत का सही फार्मूला ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित (बीएमडी) ही हो सकता है. क्योंकि इसी प्रयोग से वह 2007 में मुख्यमंत्री बनी थी.

कहा जा रहा है कि 10 सीटों पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवार मैदान में होंगे. क्योंकि गठबंधन के बाद उसे यूपी की 17 अरक्षित सीटों में से 10 सीटें हासिल हुई हैं. इसके बाद सर्वाधिक नौ सीटें ब्राह्मणों के खाते में जाएगी. बसपा आधा दर्जन के करीब मुस्लिम उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारने की तैयारी में है.

ये हैं ब्राह्मण चेहरे

बसपा ने हालांकि अभी सीटों का ऐलान नहीं किया है लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रभारी तय कर दिए हैं. वे ही लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी होंगे. बसपा ने जिन ब्राह्मण प्रभारियों के नाम तय किए हैं, वे हैं भदोही से पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा, सीतापुर से पूर्व मंत्री नकुल दुबे, अम्बेडकरनगर से राकेश पाण्डेय, फतेहपुर सीकरी से पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय, कैसरगंज से संतोष तिवारी, घोसी से भूमिहार ब्राह्मण अतुल राय, प्रतापगढ़ से अशोक तिवारी और खलीलाबाद से भीष्म शंकर तिवारी (कुशल तिवारी) के नाम तय हैं. इसमें से छह पूर्वांचल का वह क्षेत्र है, जहां प्रियंका गांधी को प्रभारी बनाया गया है.

ये है वजह

दरअसल, ओबीसी सपा का वोट बैंक माना जाता है तो दलित बसपा का. बसपा का मानना है कि ब्राह्मणों को टिकट देकर सवर्ण जुड़ जाए तो उसके वोट बढ़ सकते हैं. इसी सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखकर बसपा इस बार ब्राह्मणों को तवज्जो दे रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, दलित प्रत्याशियों के खाते में रिजर्व सीटें ही आएंगी. यही सीटें बसपा के लिए मुश्किल होती हैं. इसकी वजह यह है कि यहां सभी पार्टियों के दलित उम्मीदवार होते हैं. इन सीटों पर इस बार बसपा नए चेहरों पर दांव लगाएगी.एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

ये भी पढ़ें -

अब ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालें नहीं कर सकेंगे मोबाइल पर बात, यूपी सरकार का बड़ा फैसला

राहुल के जवाब में स्मृति ईरानी का Tweet, कहा- आपने अमेठी में शिलान्यास नहीं सत्यानाश किया

छात्रों से कराया जाता था ये काम, शिकायत किया तो अधिक्षक ने निकाला स्कूल से बाहर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लखनऊ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 5, 2019, 11:55 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर