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योगी के सामने फिर उप-चुनाव की ‘परीक्षा’, विरोधियों को दे पाएंगे जवाब ?

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने सारी जिम्मेदारी प्रदेश के नेतृत्व को दी थी लेकिन इन दोनों ही सीटों पर बीजेपी को हार मिली. अब कैराना और नुरपूर उप-चुनाव में सबकी नजर योगी पर है.

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गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उप-चुनाव के बाद योगी सरकार के सामने एक बार फिर उप-चुनाव की चुनौती है. प्रदेश की में कैराना और नुरपूर सीटों पर उप-चुनाव होने जा रहा है. वैसे तो उपचुनाव सरकार का माना जाता है लेकिन गोरखपुर और फूलपुर में बीजेपी की हार से जहां विपक्ष के हौसले बुलंद हैं तो वहीं योगी सरकार अपने कामकाज को जमीन पर उतारकर संदेश देने में जुटी है. लगातार गांवों में चौपाल का आयोजन हो रहा है, जिसमें संगठन से लेकर संगठन तक सभी जुटे हैं.

वैसे तो गांवों में चौपाल का आयोजन 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन दो सीटों पर होने वाला ये उप-चुनाव भी योगी सरकार के लिए कम बड़ी चुनौती नहीं. कैराना बीजेपी के ताकतवर गुर्जर नेता हुकूमसिंह का क्षेत्र था. ये वहीं हुकूम सिंह थे, जिन्होंने हिंदुओं के पलायान का मुद्दा गरमाया था जिसपर खूब राजनीति भी हुई. हुकूम सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं और बीजेपी के लिए इस सीट को जीतना किसी चुनौती से कम नहीं है. इसके साथ ही नुरपुर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है, जो कि बीजेपी की सीट है.

गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने सारी जिम्मेदारी प्रदेश के नेतृत्व को दी थी. ये दोनों सीटें प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की थी लेकिन इसके बावजूद बीजेपी सीट बचाने में कामयाब नहीं हो पाई. इसके चलते योगी सरकार को काफी आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी. अब एक बार फिर प्रदेश में उप-चुनाव है तो सबकी नजर योगी आदित्यनाथ की तरफ है.



बता दें कि दोनों सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 10 मई है. बीजेपी को इससे पहले अपने प्रत्याशियों का चयन भी करना है. वहीं दोनों सीटों पर 28 मई को वोटिंग होगी और और 31 मई को रिजल्ट घोषित किया जाएगा .
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