CAA Protests: उत्तर प्रदेश में अब तक 124 FIR, 705 गिरफ्तार, 4500 हिरासत में

आईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया कि यूपी में अब तक 15 लोगों की मौत हुई है.

आईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया कि यूपी में अब तक 15 लोगों की मौत हुई है.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) के अनुसार पथराव, आगजनी में 263 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से 57 पुलिसकर्मियों को गोली लगी है. उन्होंने बताया कि हिंसा में 15 लोगों की मौत हुई है. पुलिस ने नॉन प्रतिबंधित बोर के 405 खोखे बरामद किए हैं.

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लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (NRC) को लेकर उत्तर प्रदेश में दो दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन के खिलाफ यूपी पुलिस (UP Police) ताबड़तोड़ एफआईआर (FIR) दर्ज कर गिरफ्तारियां कर रही है. पुलिस के अनुसार यूपी में अब तक 15 लोगों की मौत हुई है. वहीं मामले में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के थानों में 124 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इनमें पुलिस ने अब तक 705 लोगों को गिरफ्तार किया है, वहीं 4500 लोग हिरासत में हैं.



हिंसा में अब तक हो चुकी है 15 लोगों की मौत

पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार ने बताया कि सीएए को लेकर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक 124 एफआईआर दर्ज की गई हैं. 705 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं 4500 लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया गया है. आईजी के अनुसार पथराव, आगजनी में 263 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से 57 पुलिसकर्मियों को गोली लगी है. उन्होंने बताया कि हिंसा में 15 लोगों की मौत हुई है. नॉन प्रतिबंधित बोर के 405 खोखे पुलिस ने बरामद किए हैं. आईजी के अनुसार सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई आरोपियों से वसूल कर की जाएगी.


सोशल मीडिया पर भी 14 हजार से ज्यादा आपत्तिजनक पोस्ट पर एक्शन

वहीं सोशल मीडिया पर भी पुलिस लगातार बड़ी कार्रवाई कर रही है. आईजी ने बताया कि सोशल मीडिया के 14,101 आपत्तिजनक पोस्टों से संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई है. इनमें टि्वटर की 5965, फेसबुक की 7995 और यूट्यूब की 142 आपत्तिजनक पोस्टों पर कार्रवाई की गई है. इनमें 63 एफआईआर दर्ज की गई हैं, वहीं 102 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, इनके अलावा 442 पाबंद किए गए हैं.





देश के हर राज्य में हो रहा है इस कानून का विरोध

संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.



12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ लागू हो गया कानून

नॉर्थ-ईस्ट खासकर असम में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी, कर्फ्यू लगने, इंटरनेट बंद होने के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बिल पर 12 दिसंबर 2019 को हस्ताक्षर कर दिए. इसके बाद नागरिकता कानून, 1955 में संबंधित संशोधन देश भर में लागू हो गया. सरकार की अधिसूचना के अनुसार गुरुवार को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद देश भर में यह कानून लागू हो गया है.



इनपुट: ऋषभ मणि त्रिपाठी



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