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लखनऊ यूनिवर्सिटी के कोर्स में शामिल होगा CAA, बतौर विषय पढ़ाने की तैयारी

भाषा
Updated: January 24, 2020, 10:25 PM IST
लखनऊ यूनिवर्सिटी के कोर्स में शामिल होगा CAA, बतौर विषय पढ़ाने की तैयारी
कोर्स में शामिल होगा सीएए

सीएए (CAA) को बाकायदा पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किए जाने की योजना है. विश्वविद्यालय (University) का राजनीति शास्त्र विभाग 'सीएए' को पाठयक्रम में शामिल करेगा.

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लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध में हो रहे धरनों प्रदर्शनों के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) अपने छात्रों को 'सीएए' बतौर विषय पढ़ाने की तैयारी कर रहा है. सीएए को बाकायदा पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किए जाने की योजना है. विश्वविद्यालय का राजनीति शास्त्र विभाग 'सीएए' को पाठयक्रम में शामिल करेगा.

CAA बनेगा पाठयक्रम का हिस्सा
राजनीति शास्त्र विभाग की प्रोफेसर शशि शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हम लोग अपने विभाग में संविधान और नागरिकता पढ़ाते हैं. ये भारतीय राजनीति का एक समसामयिक मुद्दा है, तो हम लोग चाहते हैं कि इसको अपने छात्र-छात्राओं को हम सीएए पढ़ाएं.' उन्होंने कहा, 'ये अभी प्रस्ताव के स्तर पर है. यह अभी पूरी अकादमिक प्रक्रिया से होकर गुजरेगा. उसके बाद पाठयक्रम का हिस्सा बनेगा.'

इंडियन पालिटिक्स पढ़ाएंगे CAA

प्रोफेसर शशि ने कहा,
'तो पहली चीज मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि फिलहाल यह पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है. लेकिन फिर भी मैं स्पष्ट कर दूं कि हम लोग नागरिकता तो पढ़ाते ही हैं ... संविधान तो हम पढ़ाते ही हैं. दूसरी बात ये है कि कोई पाठ्यक्रम जैसी चीज शुरू नहीं कर रहे हैं. हमारे यहां पेपर ही है इंडियन पालिटिक्स का. उसमें हम समसामयिक मुद्दे जो पढ़ाते हैं, उसमें अबकी बार इसको भी शामिल कर देंगे.'


CAA के बारे में सवाल पूछते हैं छात्र
उन्होंने कहा, 'बस ये है हमारा प्रस्ताव जो शिक्षकों ने तय किया है. प्रस्ताव राजनीति शास्त्र विभाग की ओर से है. आप देख ही रहे हैं कि इस पर इतनी चर्चा हो रही है.' प्रोफेसर ने कहा कि सबसे बड़ी बात है कि लोगों को जानकारी भी है और लोगों को गलत जानकारी भी है. विशेषकर हमारे छात्र-छात्राएं ये सवाल लेकर हमारे पास आते हैं कि उन लोगों से हर जगह पूछा जाता है सीएए के बारे में.उन्होंने कहा, 'हम लोग सोचते हैं कि इसको एक विषय के रूप में शुरू कर देंगे. विषय में हमारे पास कई पेपर हैं इसलिए हमारा प्रस्ताव है कि हम सीएए को भी कई विषयों में से एक विषय के रूप में शामिल करेंगे.' जब सवाल किया गया कि कब तक सीएए को पढ़ाना चालू किया जाएगा, प्रोफेसर शशि ने कहा कि इसमें कुछ समय लगेगा.

क्या अगले सत्र से इसे शुरू कर दिया जाएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर उचित अकादमिक संस्था से इसे मंजूरी मिल गयी तो इसे अगले सत्र से शुरू किया जा सकता है.

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First published: January 24, 2020, 10:25 PM IST
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