जातीय और सामाजिक समीकरण साधती बीजेपी के ये हैं राज्यसभा प्रत्याशी

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, दलित, यादव के साथ राजभर जातियों को पार्टी ने प्रतिनिधित्व दिया है. इसके साथ ही पार्टी ने किसानों और महिलाओं को भी लुभाने की कोशिश की है.

Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: March 12, 2018, 2:16 PM IST
जातीय और सामाजिक समीकरण साधती बीजेपी के ये हैं राज्यसभा प्रत्याशी
राज्यसभा के लिए पर्चा दाखिल करते अरुण जेटली
Ajayendra Rajan
Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: March 12, 2018, 2:16 PM IST
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में 8 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया. इन सभी ने सोमवार को अपना नॉमिनेशन भी फाइल कर दिया. दिलचस्प बात ये है कि इन प्रत्याशियों में अरुण जेटली और जीवीएल नरसिम्हा राव प्रदेश से बाहर के हैं. वैसे इस चुनाव में बीजेपी ने जातीय और समाजिक ताने-बाने को साधने की पूरी कोशिश की है. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, दलित, यादव के साथ राजभर जातियों को पार्टी ने प्रतिनिधित्व दिया है. इसके साथ ही पार्टी ने किसानों और महिलाओं को भी लुभाने की कोशिश की है.

देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली के बाद पार्टी के अन्य सात प्रत्याशी इस प्रकार हैं-

डॉ अशोक बाजपेई

हरदोई के डॉ अशोक बाजपेई सात बार वह विधानसभा जीत कर पहुंचे. यही नहीं, जब जीत दूर हुई तो सपा ने उन्हें विधानपरिषद भेजा. लेकिन 2017 में उन्होंने सपा छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया. डॉ.अशोक बाजपेई ने वर्ष 2017 में सपा के विधान परिषद सदस्य के पद से त्यागपत्र दिया था. इसके बाद अशोक बाजपेई लखनऊ में बीजेपी में शामिल हो गए. उनको खुद गृह मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह ने पार्टी ज्वाइन कराई.

वर्ष 1977 में पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर तत्कालीन पिहानी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. बाजपेई बाबू बनारसीदास सरकार में राज्यमंत्री बने थे, लेकिन 1980 में उन्हें हार मिली. इसके बाद उन्होंने 1985 और 1989 के चुनाव जीतने में सफल रहे थे. इस दौरान मुलायम सिंह यादव के वह करीब आए. 1989 में मुलायम सरकार में वह शिक्षामंत्री बने, लेकिन 1991 में राम लहर में उन्हें बुरी हार देखनी पड़ी. वर्ष 1993 में सपा और बसपा गठबंधन से वो फिर चुनाव जीते. इसके बाद 1996 और 2002 भी उन्हें जीत मिली और सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री तक रहे.

विजय पाल सिंह तोमर

बीजेपी ने इस बार राज्यसभा चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश को महत्व दिया है. इन्हीं में से एक विजय पाल सिंह तोमर को प्रत्याशी बनाया गया है. वह मेरठ के रहने वाले हैं. तोमर जनता दल से एक बार सरधना से विधायक चुने गए. वह तोमर किसान मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं. गन्ना किसानों को लेकर आंदोलन और बीजेपी की पैठ बढ़ाने में उनका विशेष योगदान माना जाता है. तोमर को प्रत्याशी बनाकर पार्टी ने क्षत्रिय, किसान सहित कई मोर्चों पर एक साथ निशाना साधा है.
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कांता कर्दम

हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने कांता कर्दम को ही मेयर पद का प्रत्याशी बनाया था. लेकिन वह बीएसपी की जीत को रोक नहीं सकीं. जाटव बिरादरी की कांता कर्दम बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष हैं. माना जा रहा है कि पार्टी ने इन्हें प्रत्यााी बनाकर दलित वोट बैंक और महिलाओं का प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है.

हरनाथ सिंह यादव

बीजेपी की लिस्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से एक और नाम हरनाथ सिंह यादव का शामिल किया गया है. हरनाथ सिंह यादव संघ के प्रचारक रह चुके हैं. वह एटा के रहने वाले हैं. वह पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानपरिषद में स्नातक कोटे के चुनाव में उतरे और सपा के समर्थन से जीत हासिल की. इसके बाद वह 2002 में इसी सीट पर दोबारा चुने गए. पिछली बार वह सपा से ही दावेदार थे लेकिन, उन्हें मौका नहीं मिला तो सपा के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए.

डॉ अनिल जैन

डॉ अनिल जैन बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं. बीजेपी में वह कई पदों पर रहे. इस समय वह पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ व हरियाणा के प्रभारी हैं. वैश्य समाज के डॉ. अनिल जैन को अमित शाह का करीबी माना जाता है.

सकलदीप राजभर

सकलदीप राजभर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे. वह बलिया के रहने वाले हैं. 2002 में राजभर ने बीजेपी के टिकट पर बेल्थरा रोड से विधानसभा चुनाव लड़ा. लेकिन वह जीत नहीं सके. इसके बद 2006 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निकाला भी गया. इस बार बीजेपी ने उन्हें प्रत्याशी घोषित कर पूर्वांचल के कई जिलों में मजबूत माने जाने वाले राजभर वोटबैंक को साधने की कोशिश की है. वहीं सकलदीप को बीजेपी सरकार के लिए लगातार मुश्किलें खड़ी कर रहे सहयोगी दल सहुेलदेव बहुजन समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर के तोड़ के रूप में देखा जा रहा है.

जीवीएल नरसिम्हा राव

बीजेपी की लिस्ट में यूपी से बाहर के प्रत्याशियों में से एक जीवीएल नरसिम्हा राव का नाम है. वह इस समय पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. मूलत: आंध्रप्रदेश के रहने वाले हैं. नरसिम्हा राव ने 2011 के बाद से पार्टी के केंद्रीय संगठन में अच्छी पैठ बनाई है.
First published: March 12, 2018, 2:13 PM IST
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