उत्तर प्रदेश: CBSE 12वीं की परीक्षा रद्द, पढ़ें मोदी सरकार के फैसले पर क्या है रिएक्शन

सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है.

सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है.

केंद्र सरकार ने सीबीएसई (CBSE) 12वीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है. छात्रों का मानना है कि इससे आगे के करियर में समस्याएं आएंगी, लेकिन कोरोना का खतरा इतना बड़ा है कि इसके अलावा दूसरा विकल्प भी नहीं है.

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लखनऊ. केंद्र सरकार ने सीबीएसई (CBSE) 12वीं की परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले लिया है. दसवीं की परीक्षा तो पहले ही रद्द कर दी गई थी और पिछले परफॉर्मेंस के आधार पर छात्रों को मार्क्स देने का फैसला हुआ था. लेकिन अब 12वीं की परीक्षा भी रद्द कर दी गई है. लखनऊ (Lucknow) और आसपास के कई जिलों में संचालित होने वाले निजी स्कूल के डायरेक्टर रश्मि पाठक ने बताया कि कोरोना काल में सबसे बड़ी चुनौती सभी को बीमारी से बचाना है. इस दृष्टिकोण से इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए. हालांकि इस फैसले के कई दूसरे पहलू भी हैं. मसलन, 12वीं की परीक्षा किसी भी स्टूडेंट के जीवन में वह पड़ाव होता है जहां से आगे बढ़कर वह अपने कैरियर की दिशा और दशा तय करता है.

उन्होंने कहा कि इसी मौके पर बचचे इस बात का भी पता चलता है कि कैरियर के लिहाज से उसे क्या चुनना है और उसे अपनी कौन सी कमजोरी दूर करनी है. अब परीक्षा रद्द होने के बाद तो सभी स्कूल अपने छात्रों को बढ़ाकर ही नंबर देंगे. मूल्यांकन की इस प्रणाली से इसका जजमेंट नहीं हो पाएगा कि कौन सी कमजोरी दूर करना है. दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि देश के बड़े उच्च शिक्षण संस्थानों में 12वीं के मार्क्स के आधार पर एडमिशन होते थे. उन संस्थानों में अब एडमिशन के क्या मानक होंगे, इसको लेकर छात्रों के मन में बहुत सवाल हैं. यह जरूर है कि छात्रों की एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जो इस फैसले से बहुत राहत महसूस कर रहे होंगे क्योंकि उनके अंदर 12वीं की परीक्षा में परफॉर्मेंस का कोई खौफ नहीं बचा है. वैसे छात्रों के लिए यह मौका सेलिब्रेशन से कम का नहीं है.

सरकार के फैसले पर छात्रों की राय

लखनऊ के साउथ सिटी में रहने वाली 12वीं की छात्रा संजना चौधरी कहती हैं कि इससे फायदा तो कोई खास नहीं दिखाई दे रहा है. हम आगे क्या करें क्या न करें, इस बारे में बहुत भ्रम है. सरकार को सभी का वैक्सीनेशन कराकर परीक्षा लेने के बारे में भी सोचना चाहिए था. पिछले 1 साल से कोरोना के चलते पढ़ाई बहुत डिस्टर्ब हुई है. अब परीक्षा न होने से घर में जो थोड़ी बहुत पढ़ाई का दबाव होता था वह भी खत्म हो गया है. यह जरूर है कि सेहत ठीक रहने पर सब कुछ ठीक रहेगा. आगे का रास्ता भी तय हो जाएगा क्योंकि परीक्षा के लिए आप भले ही 2 से 3 घंटे के लिए ही बाहर जाएं, खतरा तो बना ही रहेगा.
लखनऊ के तेलीबाग में रहने वाली ज्योत्सना ने बताया कि मैं तो थोड़ी निराशा हुई क्योंकि साल भर से तैयारी में जुटी थी. लेकिन यह भी उतना ही सच है कि समय बहुत मुश्किलों वाला है. उन्हें खुद कुछ दिन पहले कोरोना हो गया था. अभी भी उनकी तबीयत इतनी अच्छी नहीं है. उन बच्चों के बारे में भी सोचना चाहिए जो सेहत से जूझ रहे हैं या जिन्होंने अपने किसी को इस बीमारी के कारण खोया है. इसको देखें तो परीक्षा को रद्द किए जाने का फैसला बेहद अच्छा है. आगे देखा जाएगा कैसे क्या करना है. उसका भी रास्ता निकलेगा.

'दूसरे विकल्प पर विचार करना चाहिए था'

उत्तर प्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार को परीक्षा रद्द करने के अलावा कुछ दूसरे विकल्पों के बारे में विचार करना चाहिए था. पिछले एक डेढ़ - साल से बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है. उन्हें ट्रेनिंग ऑनलाइन दी जा रही है तो आखिर परीक्षा ऑनलाइन लेने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती. परीक्षा न लेने से एक तरीके से बच्चों के भविष्य पर धुंध सी छा गई है. बच्चों के असेसमेंट के लिए जरूर कोई विकल्प तैयार किया जाना चाहिए था.

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