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मिशन 2019: सपा-बसपा गठबंधन के बाद यूपी में ये है BJP की चुनौतियां!

Kumari ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 19, 2019, 10:04 AM IST
मिशन 2019: सपा-बसपा गठबंधन के बाद यूपी में ये है BJP की चुनौतियां!
bjp (demo pic)

बता दें कि बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य की कमी और ऐसे क्षेत्र इक्का दुक्का नहीं है, बल्कि आधे से अधिक संसदीय क्षेत्रों में यही हाल है. दूसरी तरफ जातीय समीकरण को साधना भी बीजेपी के लिए आसान नहीं है.

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2019 लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा के बीच गठबंधन का ऐलान होने के बाद पहली बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह यूपी के दौरे पर 30 जनवरी को लखनऊ आ रहे हैं. बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य. नेताओं की दावेदारी अलग बात है और जमीन की हकीकत कुछ और है. संगठन का दावा है कि कार्यकर्ताओं के मनोबल में कोई कमी नहीं है और दूसरे फेज के प्री इलेक्शन कम्पेन की रुप रेखा तैयार है. राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद कार्यकर्ताओं के बीच रहेंगे और कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश देंगे.

बता दें कि बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य की कमी और ऐसे क्षेत्र इक्का दुक्का नहीं है, बल्कि आधे से अधिक संसदीय क्षेत्रों में यही हाल है. दूसरी तरफ जातीय समीकरण को साधना भी बीजेपी के लिए आसान नहीं है. मोदी लहर में एक लाख से कम मार्जिन से बीजेपी ने जो सीटें जीती थीं वो हैं सहारनपुर 65090, नगीना 92390, मुरादाबाद 87504, रामपुर 23435, संभल 5174, सीतापुर 51027, हरदोई 81343, मिश्रिख 87363, कौशांबी 42847, इलाहाबाद 62009, बहराइच 95645, कैसरगंज 78218, श्रावस्ती 85913, बस्ती 33562, संतकबीरनगर 97978, कुशीनगर 85540,लालगंज 63086 और गाजीपुर 32452 बीजेपी को इन सीटों पर ज्यादा मेहनत करनी होगी.

इन्हीं सब कारणों के चलते कि खुद प्रधानमंत्री जनसभाओं के माध्यम से सरकार के कामकाज को जमीन पर पहुंचा रहे हैं और कमान अपनी हाथ में लिए हुए हैं. बीजेपी के महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने संगठन के बीच सामंजस्य की कमी को एक सिरे से नकार है. उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि प्रधानमंत्री उनके नेता हैं और इसका फायदा संगठन को मिलेगा. इसी कड़ी में बीजेपी भी स्ट्रोक पर स्ट्रोक मार रही है. एससी/ एसटी एक्ट हो या गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण. जीएसटी का दायरा बढ़ाने की बात हो या फिर जल्द ही किसानों को भी सौगात देने की चर्चा. सरकार की कोशिशों के बीच बीजेपी के चाणक्य अमित शाह एक बार फिर सरकार और संगठन को साधने राजधानी पहुंच रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक शाह 30 जनवरी को लखनऊ और कानपुर के दौरे पर रहेंगे. वहीं 2 फरवरी को पश्चिमी उत्तरप्रदेश की नब्ज टटोलेंगे. अमरोहा में पश्चिमी के नेताओं के साथ बैठकर रणनीति तय करेंगे. 8 फरवरी को वे काशी और गोरखपुर का प्रवास करेंगे. उनके दौरे से पहले लोकसभा चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा पार्टी संगठन के टारगेट फिक्स कर दिए हैं. सांसदों के कामकाज और लोकप्रियता के आधार पर टिकट बांटे जांएगे. उनका भी फीड बैक अगली मीटिंग में रखा जाएगा, जिसके आधार पर टिकट वितरण होने हैं.

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First published: January 19, 2019, 4:55 AM IST
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