UP Assembly Election 2022: चुनावी मैदान में उतरेगी भीम आर्मी, मार्च में ही होगी घोषणा
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UP Assembly Election 2022: चुनावी मैदान में उतरेगी भीम आर्मी, मार्च में ही होगी घोषणा
चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी पार्टी अपने मौजूदा स्वरूप में संगठन के समानांतर काम करती रहेगी. (फाइल फोटो)

चंद्रशेखर के अनुसार, इसकी औपचारिक घोषणा मार्च महीने में ही की जाएगी. उन्होंने यह बताया कि पार्टी अपने मौजूदा स्वरूप में संगठन के समानांतर काम करती रहेगी. भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर का कहना है कि राजनीति उनकी महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि मजबूरी है.

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नई दिल्ली. भीम आर्मी (Bhim Army) के चीफ चंद्रशेखर 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) लड़ने जा रहे हैं. वे इसके लिए राजनीतिक दल का गठन करेंगे. चंद्रशेखर के अनुसार, इसकी औपचारिक घोषणा मार्च महीने में ही की जाएगी. उन्होंने यह बताया कि पार्टी अपने मौजूदा स्वरूप में संगठन के समानांतर काम करती रहेगी. भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर का कहना है कि राजनीति उनकी महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि मजबूरी है.

दिसंबर में होनी थी घोषणा

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर ने कहा वे दिसंबर में एक राजनीतिक दल के गठन की घोषणा करना चाहते थे, लेकिन CAA  लागू होने के कारण यह काम रुक गया. उन्होंने कहा कि सीएए के खिलाफ लड़ना चुनाव लड़ने से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया था.



'पोस्टर-बॉय' ने जमकर बटोरी सुर्खियां



पिछले कुछ महीनों में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने अपने भाषणों गिरफ्तारियों के लिए मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरीं. वे दिल्ली में CAA के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'पोस्टर-बॉय' बनते दिखे. 37 साल के चंद्रशेखर का कहना है कि उनके पास कुछ बड़े प्लान हैं.

हैदराबाद में लिया गया हिरासत में

तिहाड़ जेल से जमानत पर रिहा होने के लगभग एक हफ्ते बाद चंद्रशेखर को 26 जनवरी को हैदराबाद में हिरासत में लिया गया था. वे यहां सीएए के मुद्दे पर छात्रों को संबोधित करने वाले थे. इसके बाद 29 जनवरी को उन्हें बेंगलूरू के एक कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेना था लेकिन इसको भी रद्द करना पड़ा.

मोहन भागवत को दी थी चुनौती

वहीं नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आजाद ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. इस दौरान वे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को चुनौती देते भी दिखे. उन्होंने भागवत को चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी.

महत्वाकांक्षा नहीं मजबूरी

राजनीति में आने की बात पर चंद्रशेखर का कहना है कि ये उनकी 'महत्वाकांक्षा' नहीं बल्कि उनकी 'मजबूरी' है. उन्होंने कहा कि वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, जेल में डाल सकते हैं और मानवाधिकारों का दुरुपयोग कर सकते हैं. इसी के लिए मैं राजनीति में आना चाहता हूं कि ताकि ये बदल सके और लोगों को उनके अधिकार मिल सकें.

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