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चित्रकूट जेल शूटआउट की कहानी FIR की जुबानी: आखिर क्यों कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं था मौजूद, उठ रहे सवाल

चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार में उठ रहे कई सवाल

Chitrakoot Jail Shootout: एफ आईआर के मुताबिक जेलर महेंद्र पाल ने सुबह 5:31 पर हाई सिक्योरिटी बैरक को खुलवाया था, ताकि बंदी अपने नित्य कर्म कर सकें. जिसके बाद जेल अधीक्षक सुबह 7:02 बजे जेल में आ गए थे और 7:55 पर जेलर अपने सरकारी आवास में नहाने- धोने और नाश्ता करने के लिए चले गए थे.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चित्रकूट जेल (Chitrakoot Jail) में हुए शूटआउट (Shootout) की एफआईआर (FIR) से बड़े खुलासे हुए हैं. जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी की ओर से लिखाई गई एफआईआर से पता चलता है कि जिस वक्त अंशु दीक्षित जेल में ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहा था, उस वक्त कोई भी वरिष्ठ अधिकारी जेल में मौजूद नहीं था. जिस वक्त ये शूटआउट हुआ उस समय जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी और जेलर महेंद्र पाल सिंह अपने अपने घरों में थे.

एफ आईआर के मुताबिक जेलर महेंद्र पाल ने सुबह 5:31 पर हाई सिक्योरिटी बैरक को खुलवाया था, ताकि बंदी अपने नित्य कर्म कर सकें. जिसके बाद जेल अधीक्षक सुबह 7:02 बजे जेल में आ गए थे और 7:55 पर जेलर अपने सरकारी आवास में नहाने- धोने और नाश्ता करने के लिए चले गए थे. वहीं जेल अधीक्षक 9:30 बजे अपने सरकारी आवास पर नहाने- धोने और नाश्ता करने गए थे.

एफआईआर के मुताबिक फायरिंग के वक्त नहीं था कोई अधिकारी मौजूद

दर्ज हुई एफआईआर के मुताबिक सुबह करीब 9:55 बजे जेल अधीक्षक को पता चला कि हाई सिक्योरिटी बैरक का एक बंदी पिस्टल से लगातार फायरिंग कर रहा है. जिसके बाद जेल अधीक्षक और जेलर अपने सरकारी आवास से 10:06 बजे जेल पहुंचे थे. 10:20 पर जेल अधीक्षक की ओर से अलार्म कराया गया और डीएम और एसपी को सूचना दी गई थी. इस घटनाक्रम के बाद अब जेल मुख्यालय की ओर से जो निर्देश जारी किए गए हैं उसमें बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि जेल अधीक्षक ,जेलर में से कोई एक अधिकारी जेल में मौजूद रहना ही चाहिए था.

हालांकि चित्रकूट जेल में जब यह वारदात हुई तो दो डिप्टी जेलर भी उस वक्त जेल में नहीं थे. बताया जा रहा है कि वह दोनों कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से छुट्टी पर चल रहे थे. अब यह सभी अधिकारी जानबूझकर जेल से बाहर थे या नहीं,यह अब जांच का विषय है.
Published by:Amit Tiwari
First published: