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सीएम योगी का भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन जारी, कानपुर विकास प्राधिकरण के रिटायर्ड इंजीनियर पर FIR
Kanpur News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 26, 2020, 4:53 PM IST
सीएम योगी का भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन जारी, कानपुर विकास प्राधिकरण के रिटायर्ड इंजीनियर पर FIR
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के मामले में कानपुर विकास प्राधिकार के अधीक्षण अभियंता (रिटायर्ड) रहे केके पांडेय के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं.

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है कि कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) की योजना डब्लू ब्लॉक जूही में सड़क सुधार के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही पूर्वक कृत्य करने वाले अधीक्षण अभियंता (अब से.नि.) के विरुद्ध अभियोग दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) लगातार भ्रष्टाचर के मामलों में कार्रवाई कर रही है. पिछले दिनों उन्नाव के डीएम को स्कूलों की ग्रांट में फर्जीवाड़ा करने के मामले में निलंबित कर दिया गया और आईएएस के खिलाफ ईओडब्ल्यू (EOW) को जांच सौंप दी गई. इसी क्रम में एक अन्य मामले में अब सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कानपुर विकास प्राधिकारण (Kanpur Development Authority) में तैनात रहे रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता केके पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है.

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है कि कानपुर विकास प्राधिकरण की योजना डब्लू ब्लॉक जूही में सड़क सुधार के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही पूर्वक कृत्य करने वाले अधीक्षण अभियंता (अब से.नि.) के विरुद्ध अभियोग दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं. जांच में पता चला है कि उनकी लापरवाही से सरकार को 2 करोड़ 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

विजिलेंस जांच में पाए गए दोषी
बता दें उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (UP Vigilence Department) की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि केके पांडेय, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण की योजना डब्लु ब्लॉक, जूही के पश्चिम भाग में सड़की के सुधार के लिए आमंत्रित टेंडर में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया. केके पांडेय द्वारा अगर समय रहते न्यूनतम टेंडर स्वीकार कर लिया गया होता तो यह कार्य 3 करोड़ 28 लाख 28,190 रुपये में पूरा हो गया होता. इसी काम के लिए फिर से न्यूनतम टेंडर बीओक्यू से 21.45 प्रतिशत उच्च स्तर पर 5 करोड़ 53 लाख 46,715 का स्वीकृत हुआ. इस प्रकार केके पांडेय की लापरवाही से सरकार को 2 करोड़ 25 लाख18,525 रुपये की वित्तीय हानि पहुंची.



उनके खिलाफ कानून का उल्लंघन कर टेंडर को समय से स्वीकार न कराकर विधि की अवज्ञा किया जाना पाया गया. और प्राधिकरण के वित्त एवं लेखा मैनुअल 2004 के प्राविधानों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया.
मामले में सीएम योगी ने विजिलेंस की खुली जांच रिपोर्ट और की गई संस्तुति को देखते हुए केके पांडेय के खिलाफ धारा 166 आईपीसी और धारा- 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (यथा संशोधित-2018) के अन्तर्गत अभियोग पंजीकृत कराकर विवेचना कराये जाने के लिए आदेश दिये हैं.

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First published: February 26, 2020, 4:53 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (08:00 AM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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