पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन पर CM योगी ने जताया शोक, बताया राष्ट्र की क्षति
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन पर CM योगी ने जताया शोक, बताया राष्ट्र की क्षति
सीएम योगी आदित्यनाथ (Fie Photo)

प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) ने जुलाई 2012 में भारत के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी. वह 25 जुलाई 2017 तक इस पद पर रहे थे.

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  • Last Updated: August 31, 2020, 6:53 PM IST
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लखनऊ. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) का सोमवार शाम निधन हो गया है. वह 84 साल के थे. उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी (Abhijit Mukherjee) ने ट्वीट कर पूर्व राष्ट्रपति के निधन की पुष्टि की है. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया. सीएम योगी ने अपने ट्वीट में लिखा, " पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न श्री प्रणब मुखर्जी जी का निधन राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है. वह सार्वजनिक जीवन में शुचिता, पारदर्शिता एवं स्पष्टवादिता की प्रतिमूर्ति थे." उन्होंने ने कहा कि परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने परमधाम में स्थान दें. ॐ शांति!

प्रणब मुखर्जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. आज सुबह ही प्रणब मुखर्जी के फेफड़ों में इंफेक्शन की पुष्टि हुई थी. फेफड़ों में इंफेक्शन के बाद से ही उनकी हालात बिगड़ती जा रही थी. प्रणब मुखर्जी को 10 अगस्त को दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल (आर एंड आर) हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. इसी दिन ब्रेन से क्लॉटिंग हटाने के लिए इमरजेंसी में सर्जरी की गई थी. इसके बाद से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी. प्रणब ने 10 तारीख को ही खुद के कोरोना पॉजिटिव होने की बात भी कही थी.


प्रणब मुखर्जी के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी. रामनाथ कोविंद ने ट्वीट में लिखा कि प्रणब मुखर्जी के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ. उनका जाना एक युग का अंत है. प्रणब मुखर्जी ने देश की सेवा की, आज उनके जाने पर पूरा देश दुखी है.



2012 में बनें थे देश के राष्ट्रपति
प्रणब मुखर्जी ने जुलाई 2012 में भारत के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी. वह 25 जुलाई 2017 तक इस पद पर रहे थे. प्रणब मुखर्जी को 26 जनवरी 2019 में भारत रत्न (Bharat Ratna) से सम्मानित किया गया था. प्रणब मुखर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय (Calcutta University) से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के साथ साथ कानून की डिग्री हासिल की थी. वे एक वकील और कॉलेज प्राध्यापक भी रहे और उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी दी गई.
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