मॉब लिंचिंग के खिलाफ असलहे खरीदने की वकालत पड़ी महंगी, कल्बे जव्वाद व महमूद प्राचा के खिलाफ तहरीर

सुबुही खान ने 20 जुलाई को कल्बे जव्वाद और प्राचा की प्रेस कांफ्रेंस के खिलाफ तहरीर दी है. उनका आरोप है कि दोनों ने धर्म विशेष को दूसरे धर्म के खिलाफ भड़काने का काम किया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 22, 2019, 4:32 PM IST
मॉब लिंचिंग के खिलाफ असलहे खरीदने की वकालत पड़ी महंगी, कल्बे जव्वाद व महमूद प्राचा के खिलाफ तहरीर
मौला कल्बे जव्वाद और वकील महमूद प्राचा प्रेस को संबोधित करते हुए
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Updated: July 22, 2019, 4:32 PM IST
शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महमूद प्राचा के खिलाफ मेरठ की वकील सुबुही खान ने सोमवार को लखनऊ के चौक थाने में तहरीर दी. सुबुही खान ने दोनों पर धर्म विशेष को दूसरे धर्म के खिलाफ भड़काने का आरोप लगाया है.

सुबुही खान ने 20 जुलाई को कल्बे जव्वाद और महमूद प्राचा की प्रेस कांफ्रेंस के खिलाफ तहरीर दी है उनका आरोप है कि दोनों ने धर्म विशेष को दूसरे धर्म के खिलाफ भड़काने का काम किया है. उनके मुताबिक दोनों के बयान देश की खिलाफत करते हैं, साथ ही वर्ग विशेष के मन में भय फैलाने वाले हैं. उन्होंने कहा कि महमूद प्राचा ने कानून की गलत व्याख्या की और उनका बयान हिंसा के लिए प्रेरित करने वाला था. उन्होंने कहा कि प्राचा ने एक विशेष समुदाय को घर के जेवर बेचकर असलहे खरीदने के लिए उकसाया है. उन्होंने बताया कि चौक पुलिस ने जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की बात कही है.

अधिवक्ता सुबुही खान


क्या है मामला?

दरअसल, शनिवार को शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद प्राचा जैसे बुद्धजीवी ने एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों को हथियार खरीदने की नसीहत दी है. बताया कि इसके लिए बाकायदा लखनऊ में 26 जुलाई को एक कैंप भी लगाया जाएगा, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को हथियार खरीदने के तरीके के बारे में जानकारी दी जाएगी.

मॉब लिंचिंग करने वालों का कोई ईमान धर्म नहीं होता है. मौके का फायदा उठाकर कुछ लोग भीड़ को मरने और मारने के लिए उकसा देते हैं. इनके खिलाफ कानून भी है और कानून अपना काम भी करता है, लेकिन सवाल ये है कि इस भीड़ के खिलाफ अगर हथियार उठाने की वकालत की जाएगी तो क्या हम हिंसक समाज की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं? ये अपने आप में बड़ा सवाल है. ये सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद प्राचा ने लखनऊ पहुंचकर शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद से मुलाकात की. उनसे मिलकर महमूद प्राचा ने कहा कि 26 तारीख को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए कैंप लगाया जाएगा. जिसमें हथियार के लिए कैसे अप्लाई किया जाए इसकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ महमूद प्राचा ने बताया कि मौलाना कल्वे जव्वाद साहब ने उन्हें यहां बुलाया है. पहला कैंप लखनऊ में 26 जुलाई को लगेगा, जिसमें हम लोग एससी-एसटी और अल्पसंख्यकों को इस बात के लिए ट्रेनिंग देंगे कि वे किस तरह से लाइसेंस के लिए अप्लाई करें. उन्होंने कहा कि आज हमारे मुल्क में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जहां एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों को मारा जा रहा है. उनकी जान को खतरा है. आरएसएस की सोच वाली संगठन इसको अंजाम दे रही हैं. सोनभद्र की घटना इसका ताजा उदहारण है.
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सिर्फ असलहे खरीदने की ट्रेनिंग

वहीं शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि 26 तारीख को जो कैंप लगेगा उसमें सिर्फ और सिर्फ इस बात की जानकारी दी जाएगी कि सरकार से असलाह कैसे लें. इसके लिए कैसे अप्लाई करें. इसमें कोई हथियार की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी और न ही किसी प्रकार के हथियार के बारे में बताया जाएगा.

वहीं जाने माने वकील और ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंमबर जफरयाब जिलानी कहतें हैं कि हथियार रखने के लिए लोगों को जोनकारी देना कोई गलत बात नही. वो कहतें हैं कि अपनी जान बचाने के लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं. उनका कहना है कि मुसलमान सिर्फ मरने के लिए नहीं है वह अपनी सुरक्षा के लिए मार भी सकता है. जब मारने वाले को डर होगा

वहीं बीजेपी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा कहतें हैं कि ऐसे पढ़े लिखे लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती. वो लोगों को शिक्षित करने की बात कहते तो समाज सुधर जाता. लेकिन वो इस बात का जवाब दें कि इस मॉब लिंचिंग की शुरुआत किसने की थी. वो तो कांग्रेस की सरकार में शुरू हुई थी.

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First published: July 22, 2019, 4:26 PM IST
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