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एक भतीजे से रूठे चाचा शिवपाल को मना रहा है यह दूसरा भतीजा

फाइल फोटो- मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव.
फाइल फोटो- मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव.

चर्चा तो यह भी है कि चाचा को भी अपने इस भतीजे से इतनी मोहब्बत है कि नाराज़गी खत्म करने के बदले में इसी भतीजे को पार्टी का एक बड़ा पद देने की शर्त भी लगा दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2019, 10:05 PM IST
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भतीजे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से नाराज़ चल रहे चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) के बीच सुलहनामे की खबरें आ रही हैं. अखिलेश यादव के खेमे ने भी इसके संकेत देने शुरु कर दिए हैं. खास बात यह है कि जो चाचा शिवपाल एक भतीजे से नाराज़ हैं तो उन्हें मनाने का काम भी उन्हीं का दूसरा भतीजा अपने ताऊ मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh) के साथ मिलकर कर रहा है. चर्चा तो यह भी है कि चाचा को भी अपने इस भतीजे से इतनी मोहब्बत है कि नाराज़गी को भुलाने की एक शर्त में अपने चहते भतीजे के लिए एक बड़ा पद मांग लिया है.

तनातनी के दौर में पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सपा से बागी हुए चाचा शिवपाल यादव सहित कई विधायकों की सदस्यता को लेकर एक याचिका दाखिल की थी. लेकिन चर्चा है कि शिवपाल यादव के खिलाफ दी गई याचिका को लेकर अखिलेश यादव नरम हो गए हैं. याचिका वापस लिए जाने के संकेत आना शुरु हो गए हैं.

दूरियां मिटाने को ऐसे तैयार हो रही है रणनीति
सूत्रों की मानें तो पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव परिवार में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच की दूरियों को मिटाने के लिए कई बैठकें हो चुकी हैं. खास बात यह है कि मुलायल सिंह के आदेश पर बैठकों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के शामिल होने पर मनाही है. फिर वो चाहें अखिलेश खेमे का हो या फिर शिवपाल यादव के गुट का. बैठक में खासतौर से मुलायम सिंह यादव के भाई और भाइयों के बेटे ही शामिल रहते हैं.
फाइल फोटो- शिवपाल यादव.




यह चहेता भतीजा बन रहा चाचा-भतीजे के बीच पुल!
गुट शिवपाल यादव का हो या फिर अखिलेश यादव का खेमा, जानकारों की मानें तो सुर्खियों में रहने वाला यह भतीजा दोनों का ही चहेता है. अक्सर खास मौकों पर यह भतीजा अखिलेश यादव के साथ देखा जाता है. सुलहनामा के चल रहे ताज़ा एपिसोड में भी इस भतीजे का नाम बीच में आ रहा है. कहा जा रहा है कि अगर चाचा-भतीजे के फिर से एक हो जाने की जो चर्चाएं सामने आ रही हैं तो वो कोशिशें भी इस भतीजे की ही देन है. भतीजा अपने ताऊ मुलायम सिंह यादव के निर्देशों पर बड़े भाई और चाचा को मिलाने का काम कर रहा है.

शर्त और बिना शर्त के बीच ऐसे हो रही बातचीत
जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव आज भी शिवपाल यादव के साथ अपने पुराने फॉर्मूले बिना शर्त सपा में वापसी की सहमति पर बातचीत करने को तैयार हुए हैं. लेकिन बातचीत शुरु होने से लेकर अब तक अखिलेश यादव थोड़े नरम हुए हैं. क्योंकि अब तक की बातचीत इस शर्त पर आगे बढ़ी है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय नहीं गठजोड़ होगा. यूपी में इस चहेते भतीजे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. शिवपाल यादव के खिलाफ दायर हुई याचिका मामले पर बरती जा रही नरमी भी अब कुछ इसी ओर इशारा कर रही है.

फाइल फोटो- पूर्व सीएम अखिलेश यादव.


2022 के यूपी विधानसभा चुनावों को देखते हुए चाचा-भतीजे के बीच चल रहे सुलहनामा के मुद्दे पर डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्वालय के समाजशास्त्री, प्रोफेसर मोहम्मद अरशद, का कहना है, “शिवपाल यादव के पार्टी से अलग होने के दिन से ही आज भी ज़मीनी कार्यकर्ता दोनों गुट की नाराज़गी के चलते सक्रिय नहीं हो पा रहा है. वहीं फिरोज़ाबाद में भी शिवपाल के साथ कुछ ऐसा हुआ कि अब उन्हें लग रहा है कि साथ मिलकर ही 2022 में वो कुछ करिश्मा दिखा सकते हैं.”

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