अमेठी में कांग्रेस के 'सेनापति' रहे संजय सिंह ने कभी राजीव गांधी को भी दी थी चुनौती

यह पहला मौका नहीं है जब संजय सिंह ने कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं. संजय सिंह वर्ष 1989 में राजीव गांधी को चुनाव मैदान में चुनौती दी थी.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 30, 2019, 5:30 PM IST
अमेठी में कांग्रेस के 'सेनापति' रहे संजय सिंह ने कभी राजीव गांधी को भी दी थी चुनौती
संजय सिंह की फाइल फोटो
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 30, 2019, 5:30 PM IST
कांग्रेस और गांधी परिवार के करीबी रहे वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामने का ऐलान किया है. उन्होंने कांग्रेस को बिना नेतृत्व वाली पार्टी करार देते हुए कहा कि आज पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा है और अब वह भी उनके साथ हैं. संजय सिंह ने बताया कि वह बुधवार (31 जुलाई) को बीजेपी में शामिल होंगे.

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब संजय सिंह कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं. अमेठी राजघराने से जुड़े संजय सिंह गांधी परिवार से नजदीकियों के बाद सुर्ख़ियों में आए थे. वर्ष 1980 में जब संजय गांधी ने अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा तो संजय सिंह ने उनका समर्थन किया था, लेकिन साल 1988 में वह जनता पार्टी से जुड़ गए. वर्ष 1989 के लोकसभा इलेक्शन में उन्होंने अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.

वर्ष 1998 में भी बीजेपी में हुए थे शामिल
साल 1998 में एक बार फिर संजय सिंह ने कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी के साथ हो लिए. वर्ष 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें अमेठी से मैदान में उतारा था. इस बार उन्होंने कांग्रेस के कप्तान सतीश शर्मा को हराकर जीत का स्वाद चखा और पहली बार लोकसभा पहुंचे. इसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर बीजेपी ने उन्हें अमेठी से मैदान में उतारा. इस बार उनके सामने सोनिया गांधी मैदान में थीं. सोनिया ने उन्हें बड़े अंतर से हराया. वर्ष 2003 में एक बार फिर संजय सिंह ने कांग्रेस में वापसी की. कांग्रेस ने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सुलतानपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया, जहां से जीतकर वह दूसरी बार लोकसभा पहुंचे.

कांग्रेस ने दो बार भेजा राज्यसभा
कांग्रेस ने संजय सिंह को दो बार राज्यसभा भेजा. वर्ष 1989 में राजीव गांधी के खिलाफ मैदान में उतरने के बावजूद कांग्रेस ने साल 1990 में उन्हें राज्यसभा भेजा. इतना ही नहीं वह राजीव गांधी की सरकार में केंद्रीय संचार मंत्री भी रहे. इसके बाद 10 अप्रैल 2014 को कांग्रेस ने एक बार फिर उन्हें असम से राज्यसभा भेजा. इतना ही नहीं हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें सुलतानपुर से टिकट दिया. हालांकि, उन्हें बीजेपी की मेनका गांधी ने हरा दिया.

पहली पत्नी गरिमा सिंह हैं बीजेपी विधायक
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संजय सिंह की पहली पत्नी रानी गरिमा सिंह मौजूदा समय में अमेठी विधानसभा सीट से विधायक हैं. बीजेपी के टिकट पर वर्ष 2017 में गरिमा सिंह ने संजय सिंह की दूसरी पत्नी अमिता सिंह को हराया था. गरिमा सिंह और संजय सिंह के बीच अमेठी के भूपति महल को लेकर विवाद चल रहा है. दरअसल, साल 1995 में संजय ने अमिता मोदी से शादी कर ली थी. उस वक्त संजय और गरिमा के घर अनंत विक्रम सिंह के अलावा दो बेटियों महिमा सिंह और शैव्या सिंह का जन्म हो चुका था. अब गरिमा सिंह और उनके तीनों बच्चे अमेठी राजघराने की विरासत पर अपना दावा ठोक रहे हैं. संजय की पहली पत्नी गरिमा आज भी खुद को तलाकशुदा नहीं मानती हैं.

विवादों में घिरे रहे हैं संजय सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजवी गांधी के करीबी दोस्त रहे संजय सिंह का विवादों से भी गहरा नाता रहा है. 28 जुलाई 1998 को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम के बाहर बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी की गोलीमार कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में भी संजय सिंह और उनकी दूसरी पत्नी अमिता मोदी को आरोपी बनाया गया था. हालांकि, बाद में दोनों का नाम केस से हटा दिया गया. कहा जाता है कि सैयद मोदी की पत्नी अमिता मोदी और संजय गांधी के बीच प्रेम प्रसंग की वजह से ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था. लेकिन, आज तक इस हत्याकांड से पर्दा नहीं उठ सका है.

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First published: July 30, 2019, 3:24 PM IST
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