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सपा-बसपा से बढ़ती दूरी के बीच यूपी में राहुल गांधी साध रहे OBC वोटबैंक पर निशाना

Ajayendra Rajan | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 8, 2018, 12:59 PM IST
सपा-बसपा से बढ़ती दूरी के बीच यूपी में राहुल गांधी साध रहे OBC वोटबैंक पर निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (File Photo)

दरअसल विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की कवायद को उस समय तगड़ी चोट लगी. जब पहले बसपा और अब सपा ने कांग्रेस के साथ राज्यों में गठबंधन नहीं करने का ऐलान कर दिया है. माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम का असर लोकसभा चुनावों में भी पड़ेगा.

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बसपा और सपा से बढ़ती दूरी के बीच लोकसभा चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. पार्टी ने इसके लिए ओबीसी वोटबैंक पर निशाना साध लिया है. पार्टी की इस कोशिश से कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव में कम से कम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को अकेले ही मैदान में उतरने की रणनीति की ओर इशारा कर रहा है.

दरअसल विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की कवायद को उस समय तगड़ी चोट लगी. जब पहले बसपा और अब सपा ने कांग्रेस के साथ राज्यों में गठबंधन नहीं करने का ऐलान कर दिया है. दोनों दलों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने गठबंधन के विषय में सकारात्मकता नहीं दिखाई. माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम का असर लोकसभा चुनावों में भी पड़ेगा. यूपी में कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी है और सपा व बसपा यहां अपने दम पर गठबंधन बनाकर बीजेपी को चुनौती देने में सक्षम नजर आ रहे हैं. ऐसे में गठबंधन में कांग्रेस के लिए जगह बनना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है.

उधर उत्तर प्रदेश में वोट बैंक प्रभावित करने की मुहिम सभी राजनीतिक दलों ने तेज कर दी है. बीजेपी लगातार पिछड़ा वर्ग सम्मेलन कर यूपी में ओबीसी मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी की इस कवायद ने जहां समाजवादी पार्टी को सतर्क कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी इस मुहिम में कूद पड़ी है. एक तरफ यूपी के ओबीसी वोटर में अच्छी दखल रखने वाली समाजवादी पार्टी अब ओबीसी समाज की जिला स्तरीय सम्मेलनों के आयोजन में जुट गई है. वहीं कांग्रेस ने भी यूपी में बड़ा ओबीसी आंदोलन करने की तैयारी कर ली है.

पिछले दिनों कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग समाज के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल सैनी ने लखनऊ में इस आंदोलन की शुरुआत कर दी. यहां कांग्रेस मुख्य़ालय में ओबीसी सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस दौरान कांग्रेस के ओबीसी विभाग के प्रभारी अनिल सैनी ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश भर से ओबीसी समुदाय के प्रतिनिधियों को बुलाकर यात्राएं करेगी. ये यात्राएं हर जिले और गांव में जाएगीं ताकि कांग्रेस को ओबीसी समाज का भरोसा मिल सके.

अनिल सैनी कहते हैं कि इस अभियान की शुरुआत हमने लखनऊ से की है. हम यूपी के तमाम जिलों, कस्बों, विधानसभाओं में ओबीसी समाज के कार्यक्रम आयोजित करेंगे. ताकि आने वाले चुनाव में कांग्रेस यहां मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके.

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कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग समाज के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल सैनी. Photo: News 18


दरअसल बीजेपी, सपा के बाद अब कांग्रेस की इस कवायद के पीछे यूपी की जातीय गणित है. उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछड़ा वर्ग की अहम भूमिका रही है. माना जाता है कि करीब 50 प्रतिशत ये वोट बैंक जिस भी पार्टी के खाते में गया, सत्ता उसी की हुई. 2014 और 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को पिछड़ा वर्ग का अच्छा समर्थन मिला. नतीजतन वह केंद्र और राज्य की सत्ता पर मजबूती से काबिज हुई.
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अब महागठबंधन की आहट और उपचुनावों में हार के बाद बीजेपी ने पिछड़ी जातियों को लुभाने, मनाने के लिए सम्मेलनों का सहारा लिया है. इस पूरी कवायद की अगुवाई प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कर रहे हैं, वहीं संगठन और पार्टी के विभिन्न जातियों के नेता केशव की अगुवाई में जोर लगाए हुए हैं.

(इनपुट: शिवानी शर्मा)

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First published: October 8, 2018, 12:59 PM IST
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