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मुन्ना बजरंगी मर्डर केस: हत्या के पीछे पुलिस खंगाल रही मुख्तार अंसारी का कनेक्शन!

डॉन मुन्ना बजरंगी और मुख्तार अंसारी

डॉन मुन्ना बजरंगी और मुख्तार अंसारी

मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के मामले में उनके साले सत्यजीत सिंह ने आरोप लगाया था कि सफेदपोश नेताओं के इशारे पर शासन व प्रशासन की साजिश की तहत हत्या कराई गई है.

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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का खात्मा 9 जुलाई की सुबह बागपत की जेल में हुआ जब सुनील राठी ने पूरी की पूरी मैगजीन मुन्ना बजरंगी के सिर में उतार दी. मुन्ना की हत्या के पीछे पुलिस की जांच में सोमवार चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी अब मुन्ना बजरंगी और बृजेश सिंह से नाराज चल रहा था. क्योकि उसके करीबियों ने बताया था कि 100 करोड़ रुपये बालू के ठेके पर कब्जा करने के लिए बृजेश और मुन्ना करीब आ चुके है. दोनों के बीच टेंडर को लेकर समझौता चुका था. बदलते वक्त के साथ दोनों के बीच दोस्ती बढ़ती जा रही था. वहीं मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद बजरंगी परिवार का बेहद खास माने जाने वाले मुख्तार ने उसके करीबियों के किसी सदस्य से मुलाकात नहीं की.

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मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के मामले में उनके साले सत्यजीत सिंह ने आरोप लगाया था कि सफेदपोश नेताओं के इशारे पर शासन व प्रशासन की साजिश की तहत हत्या कराई गई है. उनका कहना है कि अगर सरकार सचेत होती तो आज माफिया डॉन जिंदा होता.



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बजरंगी की हत्या के बाद एक बार​ फिर उत्तर प्रदेश उसी गैंगवार के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है, जिसने अब तक पूर्वांचल में दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतार दिया. उत्तर प्रदेश सरकार ने एहतियातन जेल में बंद सभी माफियाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है.

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दरअसल करीब तीन दशक में यूपी के दो बड़े माफिया ब्रजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच वर्चस्व की जंग में न जाने कितनी लाशें गिर चुकी हैं. कहा जाता है कि इस गैंगवार में कभी मुन्ना बजरंगी को ब्रजेश की कमर तोड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया तो कभी मुख्तार पर जानलेवा हमला हुआ. गैंगवार की इस कहानी में एके-47 से लेकर सियासी रंजिशें और जेल में हत्या से लेकर बीच बाजार में चलती गोलियां शामिल हैं.

(रिपोर्ट: ऋषभ मणि त्रिपाठी)

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