UP News: लोक निर्माण विभाग में अफसरों की तैनाती का अजब-गजब खेल, टीचर को बना दिया GM

लखनऊ स्थित निर्माण भवन (File Photo)

लखनऊ स्थित निर्माण भवन (File Photo)

UP News: लोक निर्माण विभाग (PWD) और राजकीय निर्माण निगम (UPRNN) में अफसरों की तैनाती में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 8:39 AM IST
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लखनऊ. एक तरफ प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है. कई अफसरों पर गाज गिर चुकी है. दूसरी तरफ, लोक निर्माण विभाग (PWD) और राजकीय निर्माण निगम (UPRNN) पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा है. यहां अफसरों की तैनाती में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है. इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सत्यवीर सिंह यादव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मामला उनकी प्रतिनियुक्ति के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि प्रतिनियुक्ति ख़त्म होने के आदेश के बावजूद बड़े अधिकारियों की सांठ-गांठ के चलते सत्यवीर सिंह यादव उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम में बने हुए हैं. उनकी प्रतिनियुक्ति की अवधि ख़त्म हो चुकी है.

दरअसल, सत्यवीर सिंह यादव 15 जुलाई 2018 को ही प्रतिनियुक्ति ख़त्म होने पर मूल विभाग में वापसी का आदेश होने के के बावजूद कुर्सी पर क़ाबिज़ हैं. यही नहीं सत्यवीर सिंह पर बहराइच मेडिकल कालेज के निर्माण में वित्तीय गड़बड़ी का गम्भीर आरोप भी है. इस मामले बीजेपी के विधायक राकेश सिंह बघेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इसकी लिखित शिकायत भी की थी. पत्र में राकेश सिंह बघेल ने लिखा था की राजकीय एलोपथिक मेडिकल कॉलेज, बाहराइच के निर्माण में अनियमितता में जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद 4 लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई संपादित की गई, लेकिन इनमें से 3 पर ही कार्रवाई की गई, जबकि मुख्य दोषी सत्यवीर सिंह यादव को बचा लिया गया.

इस पर भी सवाल खड़े किए गए कि बतौर अधिशासी अभियंता से प्रतिनियुक्ति पर आने पर उन्हें प्रोजेक्ट मैनेजर की जगह महाप्रबंधक के पद पर तैनाती कैसे दी गयी? हालात ये हैं कि गम्भीर वित्तीय अनियमितता का आरोप होने के बावजूद सत्यवीर सिंह यूपीआरएनएन में बने हुए हैं.

पॉलिटेक्निक के टीचर को बनाया जीएम


इतना ही नहीं निर्माण निगम के इतिहास में ऐसा पहला कारनामा सामने आया होगा, जिसमें नियमों की अनदेखी कर पॉलिटेक्निक के टीचर जितेंद्र मौर्य को जीएम, लखनऊ का पद दे दिया गया. जितेंद्र मौर्य की कहानी और ज़्यादा चौंकाती है. मिली जानकारी के मुताबिक़ जितेंद्र मौर्य को ड्रॉइंग और डिजाइनिंग का अनुभव है. फ़ील्ड का कोई अनुभव नहीं. बावजूद इसके इन्हें 1 हजार करोड़ से भी ज़्यादा के प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी दी गई. इसके अलावा जितेंद्र मौर्य का भी प्रतिनियुक्ति कार्यकाल ख़त्म हो चुका है. बावजूद इसके लखनऊ अंचल के जीएम सिविल बने बैठे हैं. अब मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग की तरफ़ से जांच की बात कही जा रही है.
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