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Fight Against Covid-19: लॉकडाउन के बीच एक फोन पर 1500 KM दूर लखनऊ को निकल पड़ा स्कॉलर, जानें क्यों
Lucknow News in Hindi

MANISH KUMAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 9, 2020, 2:20 PM IST
Fight Against Covid-19: लॉकडाउन के बीच एक फोन पर 1500 KM दूर लखनऊ को निकल पड़ा स्कॉलर, जानें क्यों
एक कॉल पर तेलंगाना के हैदराबाद से सीधे लखनऊ के केजीएमयू पहुंचे माइक्रोबायोलॉजिस्ट रामाकृष्णा

Fight Against Covid-19: तेलंगाना (Telangana) के खम्मम (Khammam) जिले के सुदूर गांव के निवासी रामाकृष्णा एक फोन कॉल पर लखनऊ पहुंच गए.

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लखनऊ. जब पूरा देश कोरोना वायरस (COVID-19) से बचने के लिए घरों में कैद हो रहा था, उस समय एक इंसान 1500 किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ा था. तमाम लोगों के उलट वह अपना स्थायी ठिकाना छोड़कर घर से निकल पड़ा. उसे हर हाल में जल्द से जल्द हैदराबाद से लखनऊ पहुंचना था. दरअसल, उसे लखनऊ (Lucknow) के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की लैबोरेटरी में पहुंचना था, जहां कोरोना की जांच में वह सहयोग कर सके. यह कहानी तेलंगाना (Telangana) के माइक्रोबायोलॉजिस्ट रामाकृष्णा की है.

तेलंगाना के खम्मम जिले के सुदूर गांव में रहने वाले रामाकृष्णा का उस समय फ़ोन बज उठा, जब वह अपने मां-पिता के साथ खेत मे काम कर रहे थे. फोन देखकर थोड़ी हैरत तो जरूर हुई कि अचानक 6 महीने बाद उनके गाइड की कॉल क्यों आई? फोन पर दूसरी तरफ से आवाज आई, 'रामाकृष्णा क्या तुम लखनऊ आ सकते हो? यहां तुम्हारी जरूरत है.' रामाकृष्णा सोच में पड़ गए. उन्हें एक घंटे सोचने के लिए दिए गए.

दरअसल, लखनऊ बुलाने के लिए उन्हें केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजिस्ट विभाग की हेड डॉ. अमिता जैन ने फोन किया था. डॉ. जैन के रिसर्च स्कॉलर रहे रामाकृष्णा इस तरह की जांचों में अहम भूमिका निभा चुके थे. उन्होंने अपनी रिसर्च के दौरान जीका वायरस, स्वाइन फ्लू, जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों की जांच में अहम भूमिका निभाई थी. अब कोरोना की जांच में उनकी जरूरत थी.



...फिर लिया झूठ का सहारा



रामाकृष्णा ने पलटकर लखनऊ फ़ोन किया और बताया कि वह आ रहे हैं. रामाकृष्णा ने अपने माता-पिता को लखनऊ जाने की बात बताई. यह सुनकर उनके ऊपर तो जैसे बिजली गिर गई. दोनों ने मना कर दिया. अब मामला फंस गया. रामाकृष्णा ने आखिरकार झूठ बोला कि वह अपने एक दोस्त के यहां हैदराबाद जाएंगे, जहां वह अपनी थीसिस पूरी करेंगे क्योंकि गांव में यह काम ठीक से नहीं हो रहा है. बता दें कि रामाकृष्णा टीबी पर पीएचडी कर रहे हैं और उसके लिए अपनी थीसिस पूरी करने गांव चले गए थे. खैर इस बात पर घर में रज़ामंदी हो गई और वह निकल पड़े. इसके बाद शुरू हुआ रामकृष्णा का 1500 किलोमीटर का सफर.

पुलिस ले गई थाने
रामाकृणा खम्मम से सीधे बस से हैदराबाद पहुंचे. इसी बीच उन्होंने अपने एक दोस्त को हैदराबाद से लखनऊ की फ्लाइट का टिकट करने को बोल दिया. रविवार 22 मार्च की सुबह वह हैदराबाद पहुंच गए, लेकिन उस दिन जनता कर्फ्यू था. लिहाजा, दिनभर अपने दोस्त के कमरे में रहे. आधी रात को ढ़ाई बजे कमरे से फ्लाइट पकड़ने के लिए निकल पड़े, क्योंकि भोर में साढ़े 4 बजे फ्लाइट थी. वह एयरपोर्ट जाने के लिए सड़क पर आए ही थे कि अचानक पुलिस की पेट्रोलिंग वैन आ गई. इसके बाद पुलिस उन्हें लेकर मसाब टैंक के थाने चली आई. उनसे पूछताछ होने लगी कि वे आधी रात को बैग लेकर सड़क पर क्या कर रहे थे? उनके पूरी बात बताने के बाद पुलिस को यकीन हुआ, तब उन्हें छोड़ा गया.

इसके बाद रामकृष्णा मुश्किल से मिले एक ऑटो को पकड़कर एयरपोर्ट पहुंचे और फिर सीधे फ्लाइट लेकर लखनऊ आ गए. अगले दिन उन्होंने केजीएमयू की कोरोना जांच की लैबोरेटरी को जॉइन कर लिया. इसके बाद से ही रामकृष्णा अब रोज सैंपल टेस्ट कर रहे हैं.

कोरोना जांच करने के लिए थीसिस छोड़ी अधूरी
रामाकृष्णा टीबी पर रिसर्च कर रहे हैं. साल 2014 में वे केजीएमयू आए थे. उनका प्रोजेक्ट 6 महीने पहले पूरा हो गया और अब थीसिस जमा करनी थी, इसीलिए वे गांव चले गए थे. दिन-रात लगकर अपनी थीसिस पूरी कर रहे थे, लेकिन अब उसे अधूरा छोड़कर कोरोना की जांच में जुट गए हैं.

मां से रोज बोलते हैं झूठ
रामाकृष्णा के सामने तब धर्मसंकट खड़ा हो जाता है, जब उनकी मां का फ़ोन आता है. वह कहती हैं कि अपने दोस्त से बात कराओ, जिसके यहां रुके हो. वे कॉन्फ्रेंस कॉल करके हैदराबाद के अपने दोस्त से बात कराते हैं. रामाकृष्णा ने बताया कि उनके मां-बाप ग्रामीण परिवेश के हैं और वे नहीं जानते कि कॉन्फ्रेंस कॉल क्या होती है?

सैलरी और पोस्ट के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं
रामाकृष्णा ने बताया कि अभी उन्हें नही मालूम है कि उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी और कौन सी पोस्ट मिलेगी? हां, इतना जरूर है कि उनकी हेड ने बताया है कि इमरजेंसी के इस दौर में कुछ पोस्ट निकाली गई हैं और कुछ फंड का भी इंतजाम किया गया है.

'रामकृष्णा का आना साहसी कदम'
केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हेड डॉ अमिता जैन ने बताया कि देश में लॉकडाउन से पहले इनका आ जाना बहुत राहत देने वाला है. ऐसे समय में जब लोग भागते हैं. इन्होंने खुद इस काम में अपने को झोंककर बेहतरीन नजीर पेश की है. उन्होंने ये भी बताया कि रामाकृष्णा बहुत मेहनती और काबिल हैं और उनके आ जाने से काम मे बहुत राहत मिली है. सैलरी के बारे में पूछे जाने पर डॉ. जैन ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इनके लिए कुछ करेगा.

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First published: April 9, 2020, 12:04 PM IST
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