यूपी के क्वारंटाइन सेंटरों में क्षमता से बेहद कम लोग, फिर भी क्यों मिल रही अव्यवस्था की शिकायतें?

आगरा क्वारंटाइन सेंटर से मिली थी शिकायत

आगरा क्वारंटाइन सेंटर से मिली थी शिकायत

बता दें कि अभी तक यूपी में कुल 5 हजार 470 क्वारंटीन सेंटर तैयार हैं, जिनकी क्षमता 4 लाख से ज्यादा लोगों को रखने की है. सरकार ने इन्हें आश्रय स्थल का नाम दिया है.

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लखनऊ. यूपी (Uttar Pradesh) में बाहर से आये दूसरे जिलों के फंसे लोगों के साथ ही संदिग्धों को क्वारंटाइन (Quarantine) करने के लिए जितने सेंटर्स बनाये गये हैं, उनकी क्षमता से 10 फीसदी से भी कम लोग अभी मौजूद हैं. फिर भी कई जिलों से क्वारंटाइन सेंटर में अव्यवस्था की आने वाली शिकायतें चिन्ता पैदा करती हैं. कई जगहों से लोगों के भाग जाने की खबरें आयीं, जबकि कई जगहों पर भारी अव्यवस्था देखने को मिली. बता दें कि अभी तक यूपी में कुल 5 हजार 470 क्वारंटीन सेंटर तैयार हैं, जिनकी क्षमता 4 लाख से ज्यादा लोगों को रखने की है. सरकार ने इन्हें आश्रय स्थल का नाम दिया है.



आज़मगढ़, आगरा, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, उन्नाव, कानपुर समेत तमाम जिलों से पिछले दिनों संदिग्धों के भागने या फिर अव्यवस्था की शिकायत मिली. आगरा में तो वीडियो वायरल कर इसकी जानकारी दी गई. शारदा ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट में रखी गई एक महिला ने वीडियो वायरल कर अव्यवस्था को उजागर किया. हालांकि इस मामले में जिम्मेदार बीडीओ मनीष वर्मा को निलंबित कर दिया गया. उधर रायबरेली और आजमगढ़ से शिकायत मिली की बदबूदार खाना मिल रहा है. इतना ही नहीं टॉयलेट भी गंदा है. लेकिन सवाल यही है कि शिकायत क्यों? ऐसा नहीं है कि सरकार ने व्यवस्था में कोई कमजोरी छोड़ी है लेकिन, जिला प्रशासन की क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे लोगों के प्रति उदासीनता किरकिरी का बड़ा कारण बन रही है. हालात नहीं सुधरे तो ऐसी शिकायतें और बढ़ती जायेंगी, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को दूसरे राज्यों से आना जारी है.



किस जिले में कितने क्वारंटाइन सेंटर  





प्रदेश में अभी तक कुल 5470 क्वारंटाइन सेंटरों में सबसे ज्यादा महराजगंज में बनाये गये हैं. यहां अभी तक कुल 738 क्वारंटाइन सेंटर बना दिये गये हैं. इनकी क्षमता 19 हजार 500 लोगों को रखने की है. हालांकि अभी तक महज 336 लोग ही इन केन्द्रों में रह रहे हैं. दूसरे नंबर पर संतकबीरनगर है जहां केन्द्रों की कुल संख्या 653 है. 442 केन्द्रों के साथ अमेठी तीसरे जबकि 287 केन्द्रों के साथ देवरिया चौथे नम्बर पर है. इस क्रम में पांचवा नम्बर बाराबंकी का है जहां 287 केन्द्र बनाये गये हैं. इन सभी जिलों में क्षमता से बहुत कम लोग केन्द्रों में रह रहे हैं.
उन जिलों की क्या स्थिति जहां से आयी शिकायतें



कोरोना संक्रमण में जैसे आगरा टॉप पर चल रहा है, शिकायतों में भी ये जिला पीछे नहीं है. इसी हफ्ते ताजनगरी के एक क्वारंटाइन सेंटर से भारी अव्यवस्था का वीडियो सामने आया जिसमें भेड़-बकरी की तरह लोग भरे दिखे. ऐसा क्यों हुआ? आगरा में बनाये गये 4 केन्द्रों की क्षमता 550 है जबकि यहां महज 105 लोग ही रह रहे हैं. यानी क्षमता का पाचवां हिस्सा. फिर भी अव्यवस्था का आलम देखने को मिला. यहां का केस तो थोड़ा बाकी जिलों से अलग था. बाकी जिलों के क्वारंटाइन सेंटरों से साफ सफाई न होने की ही शिकायतें दर्ज की गयी. कई जगहों पर खाने की गड़बड़ी की भी शिकायत आयी.



किन जिलों में सबसे ज्यादा लोग हैं क्वारंटाइन



सिद्धार्थनगर में सबसे ज्यादा लोग क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे हैं. यहां 2504 लोग केन्द्रों में है. इसी तरह सीतापुर में 1500, सोनभद्र में 1216, बलरामपुर में 1190 जबकि बुलंदशहर में 1048 लोग क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे हैं. इनमें से ज्यादातर जिलों में से क्वारंटाइन सेंटर की कोई शिकायत नहीं आयी है. सोनभद्र के जिलाधिकारी से न्यूज 18 ने इस पर बात की. उनसे पूछा गया कि कैसे व्यवस्थायें दुरुस्त हों? .सोनभद्र के जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने बताया कि क्वारंटाइन सेंटरों में व्यवस्थायें दुरुस्त रखने के लिए उन्होंने तीन चीजों का खास ख्याल रखा है. पहली साफ सफाई, दूसरी भोजन की समय से उपलब्धता और लोगों से फीडबैक. उन्होंने बताया कि क्वारंटाइन सेंटरों में पहले से उपलब्ध टॉयलेट्स के अलावा और ज्यादा बनाये गये. हर व्यक्ति को अलग-अलग साबुन और ब्रश-पेस्ट दिये गये हैं. उन्होंने बताया कि क्वारंटाइन सेंटर्स में ज्यादातर लेबर क्लास के लोग हैं. ऐसे में भोजन की टाइमिंग का हमने खास ध्यान रखा है. इनकी आदत के मुताबिक हम सुबह और शाम जल्दी भोजन मुहैया करा देते हैं. 15 कम्यूनिटी किचेन इन्हीं के लिए डेडीकेटेड है. इन सभी किचेन में वरिष्ठ अधिकारी लगातार विजिट भी करते हैं. आगरा के उलट यहां क्वारंटाइन सेंटर में सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखा जा रहा है. डीएम ने बताया कि जितने भी नोडल अफसर बनाये गये हैं उनमें कोई भी बीडीओ के नीचे लेवेल का अफसर नहीं है. इसके अलावा खुद वे और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी विजिट करते हैं. लोगों से फीडबैक लेते हैं. किसी की कोई इण्डीविजुअल डिमाण्ड आती है तो उसे भी पूरा किया जाता है. साथ ही समय समय पर इनकी टेस्टिंग भी करायी जाती है. डीएम ने बताया कि सोनभद्र में जितनी कोरोना जांचें हुई हैं उनमें से 40 फीसदी क्वारंटीन सेंटर के लोगों की हुई है. बता दें कि सोनभद्र में अभी तक कोरोना का एक भी केस सामने नहीं आया है.



मुख्य सचिव ने जारी किया निर्देश



उधर मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने टीम 11 के दौरान निर्देश दिए हैं कि कोविड केयर सेंटरों, क्वारंटाइन सेण्टर्स तथा आश्रय गृहों का मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ निरीक्षण कर उच्च उच्च स्तरीय व्यवस्थायें सुनिश्चित करायी जायें. सभी चिकित्सालयों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण जैसे पीपीई, एन-95 मास्क आदि भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने चाहिये. मुख्य सचिव ने यह निर्देश सम्बन्धित जनपदों के समस्त नोडल अधिकारियों एवं जिलाधिकारियों को दिये हैं.



क्वारंटाइन सेंटर के क्या हैं पैमाने?



सरकार ने क्वारंटाइन सेंटर या इन आश्रय स्थलों के लिए बकायदा पैमाना तय किया है. इसके मुताबिक दो लोगों की चारपाई के बीच लगभग 2 मीटर की दूरी रखी जायेगी. सभी लोग मास्क पहनेंगे. हर रोज डॉक्टरों की टीम इनकी स्क्रीनिंग करेगी. इन्हें समय पर और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला भोजन मुहैया कराया जायेगा.



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