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COVID-19: खतरे के मद्देनजर जेलों से रिहा किए जाएंगे कैदी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बन रही लिस्ट...

कोरोना वायरस के संक्रमण खतरे के मद्देनजर जेलों से रिहा किए जाएंगे कैदी 
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस के संक्रमण खतरे के मद्देनजर जेलों से रिहा किए जाएंगे कैदी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

COVID-19 Effect: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यूपी की 71 जेलों ने लिस्ट बनाने का काम शुरू कर दिया है. जेलों से ये लिस्ट आने के बाद जेल मुख्यालय उसका परीक्षण करेगा. परीक्षण के बाद कैदियों को छोड़ने पर फैसला होगा.

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लखनऊ/एटा. देश में कोरोना (COVID-19) के बढ़ते प्रकोप को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम निर्देश दिया था कि सात साल से कम की सज़ा पाए या सात साल से कम की सज़ा के आरोपों में जेल में बंद अंडर ट्रायल (Under Trial) कैदी (Prisoner) व 65 साल से ऊपर की उम्र के कैदियों को नियमों व शर्तों के दायरे में रहते हुए छोड़ दिया जाए. निर्देश के मुताबिक सभी राज्य सरकारों को एक उच्च शक्ति समिति का गठन करने को कहा गया है जो यह निर्धारित करेगी कि किन कैदियों/अपराधियों को इन हालातों में सशर्त जमानत (Conditional bail) दी जा सकती है.

यूपी की 71 जेलों में बनाई जा रही लिस्ट
राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामे (Affidavit) एवं सालिसिटर जनरल तुषार मेहता व दुष्यंत दवे के दिए गए सुझावों के बाद कोर्ट ने यह निर्देश दिया है. जिसके बाद आशा की जा रही है की देश भर में अलग अलग जेल में बंद हज़ारों कैदियों को इससे राहत मिलेगी. इस निर्देश के बाद यूपी जेल मुख्यालय (UP Jail Headquarter) ने यूपी की सभी जेलों से छोड़े जाने योग्य कैदियों की लिस्ट मांगी थी जिसके बाद यूपी की 71 जेलों ने लिस्ट बनाने का काम शुरू कर दिया है. जेलों से ये लिस्ट आने के बाद जेल मुख्यालय उसका परीक्षण करेगा. परीक्षण के बाद कैदियों को छोड़ने पर फैसला होगा. एक बार बनाई लिस्ट पर अपर मुख्य सचिव गृह, डीजी जेल और स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन की समिति फैसला लेगी.

एटा जिला कारागार ने 158 कैदियों की लिस्ट बनाई
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने सात साल के सजायाफ्ता और अंडर ट्रायल कैदियों को छोड़ने का निर्देश दिया है. सर्वोच्च कोर्ट के इसी आदेश का अनुपालन करते हुए एटा जेल प्रशासन (Etah Jail Administration) ने शासन को सूची भेज दी है. कोर्ट के आदेशानुसार सूची में उन कैदियों/अपराधियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनकी सजा सात साल से कम है. इस मामले पर बातचीत में जेल अधीक्षक पीपी सिंह ने बताया कि एटा जेल में कैदियों की कुल संख्या 1,188 है जिसमें से सिर्फ 158 कैदी ही ऐसे हैं जिनकी सजा 7 साल से कम है.



कैदियों की चिकित्सा केंद्र व राज्य सरकारों के लिए अहम विषय है
गौरतलब है कि निर्देश देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जेलों में भीड़-भाड़ बहुत रहती है. ऐसे में जेलों में हालात बिगड़ सकते हैं ? यदि जेल में कोरोना वायरस प्रकोप होता है, तो यह बहुत बड़ी संख्या को प्रभावित करेगा और यह कोरोना वायरस फैलाने का केंद्र बन सकता है. बताते चलें की 16 मार्च को मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, महानिदेशकों (कारागार) और सभी राज्यों के सामाजिक कल्याण मंत्रालयों को नोटिस जारी किया और पूछा था कि वे इस मामले में क्या कदम उठा रहे हैं ? देश भर की जेलों में बंद कैदियों की चिकित्सा केंद्र व राज्य सरकारों के लिए एक अहम विषय है. कोर्ट के इस निर्देश से राज्य सरकारों को एक नयी दिशा मिली है. यूपी की 71 जेलों द्वारा भी सुप्रीम कोर्ट के इसी दिशा-निर्देश के तहत सात साल से कम सजा पाए व अंडर ट्रायल कैदियों लिस्ट बना कर भेजी जा रही है हालांकि इस लिस्ट पर फाइनल निर्णय अपर मुख्य सचिव गृह, डीजी जेल और स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन की समिति लेगी.

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