Coronavirus in UP: 91.4 फीसदी तक पहुंचा रिकवरी रेट, 24 घंटे में 7,336 नए कोरोना केस

यूपी में रिकवरी रेट 90 फीसदी हुई.. (Pic- AP)

यूपी में रिकवरी रेट 90 फीसदी हुई.. (Pic- AP)

UP Corona Update: उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 7,336 नए कोरोना (COVID-19) केस सामने आए हैं. सूबे में रिकवरी रेट 91.4 फीसदी हो गई है.

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लखनऊ. कोरोना संक्रमण (COVID-19) की दूसरी लहर का सामना कर रही उत्तर प्रदेश के लिए एक अच्छी खबर है. प्रदेश सरकार के मुताबिक, सूबे का रिकवरी रेट 90 फीसदी से ज्यादा हो गया है. उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 24 घंटों में कोविड संक्रमण के 7,336 नए मामले सामने आए हैं. आज 19,669 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है. राज्य में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 1,23,579 है. अब तक कुल 15,02,918 लोग ठीक हो चुके हैं. रिकवरी रेट 91.4 फीसदी है.

अमित मोहन प्रसाद के मुताबिक, 282 मृत्यु पिछले 24 घंटे में पोर्टल पर दर्ज की गई हैं. कल प्रदेश में 2,99,327 सैंपल्स की जांच की गई, जो एक दिन की रिकॉर्ड संख्या है. अब तक कुल 4,55,31,018 टेस्ट किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अभी ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण अधिक नहीं है. हमारी कोशिश है वहां टीम भेजकर संक्रमण को फैलने से रोकने का काम किया जाए. 68 फीसदी गांव अभी भी संक्रमण से बचे हुए हैं. हमारा पूरा प्रयास है उन गांवों में संक्रमण न पहुंचे. अभी 88764 व्यक्ति होम आइसोलेशन में हैं.


सरकार ने कसी कमर
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर  को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. इस तीसरी लहर में बच्चों को कोविड संक्रमण से बचाने के लिए योगी सरकार डाक्टरों की स्पेशल ट्रेनिंग करवाने जा रही है. गोरखपुर में जापानी इंसेफ़्लाइटिस से निजात दिलाने वाले विशेषज्ञ ये ट्रेनिंग देंगे. स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बताया कि विशेषज्ञ कोरोना की संभावित तीसरी लहर के प्रति बच्चों को अधिक संवेदनशील बता रहे हैं. इन आशंकाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में बच्चों को ऐसी किसी संभावित लहर से बचाने के लिए पहले से ही युद्ध स्तर पर तैयारियां जारी हैं.





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दरअसल इसमें योगी आदित्यनाथ ने 1998 से लेकर मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के पहले तक पूर्वांचल के मासूमों के लिए काल बनी इंसेफेलाइटिस के नियंत्रण के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष किया. फिर सीएम बनने के बाद पीएचसी और सीएचसी तक इंसेफेलाइटिस को केंद्र में रखकर स्वास्थ्य सुविधाओं की बुनियादी संरचना को मजबूत किया. तीन दर्जन से अधिक संवेदनशील जिलों में रोकथाम को लेकर सफाई और स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाया. उससे इंसेफेलाइटिस तकरीबन खत्म होने के कगार पर है.

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