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COVID-19: जब कोई सोसाइटी होती है लॉक डाउन, तो जानिए क्या है इसका मतलब?
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News18 Uttar Pradesh
Updated: March 21, 2020, 2:38 PM IST
COVID-19: जब कोई सोसाइटी होती है लॉक डाउन, तो जानिए क्या है इसका मतलब?
देश में कई जगह सोसाइटी आइसोलेट की जा रही हैं. जानिए क्या है इसका मतलब

जब कोई सोसाइटी लॉक डाउन (Lock Down) होती है तो इसका मतलब क्या होता है? यहां रहने वाले लोगों की जरूरतों का ख्याल कैसे रखा जाता है? किन चीजों की छूट होती है और किन चीजों पर पाबंदी लग जाती है?

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लखनऊ. बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर (Kanika Kapoor) 13 मार्च को कानपुर के विष्णुपुरी में स्थित कल्पना टावर में अपने मामा के यहां गृह प्रवेश मे आई थीं. अब कनिका के कोरोना पॉजिटिव (COVID-19 Positive) निकलने के बाद कानपुर (Kanpur) के इस कल्पना टावर को आइसोलेट (Isolate) कर दिया गया है. वहीं देशभर में कई जगह सोसाइटी लॉक डाउन (Lock Down) की खबरें हैं. आइए जानते हैं कि जब कोई सोसाइटी लॉक डाउन होती है तो इसका मतलब क्या होता है? यहां रहने वाले लोगों की जरूरतों का ख्याल कैसे रखा जाता है? किन चीजों की छूट होती है और किन चीजों पर पाबंदी लग जाती है?

दरअसल एपिडेमिक या किसी आपदा के समय शहर में सरकारी तौर पर लागू की जाने वाली इमरजेंसी व्यवस्था लॉक डाउन है. इस दौरान संबंधित क्षेत्र के लोगों को घर से निकलने की अनुमति नहीं होती है. विशेष परिस्थितियों में ही उन्हें सिर्फ दवा या अनाज जैसी जरूरी चीजों के लिए बाहर निकलने की इजाजत दी जाती है.

इस संबंध में लखनऊ के एडिशनल सीएमओ केपी त्रिपाठी बताते हैं कि सोसाइटी को आइसोलेट किए जाने के दौरान  नियमानुसार दो तरह से प्रक्रिया चलती है. एक प्रॉपर सैनिटाइजेशन जो स्वास्थ्य विभाग देखता है और दूसरा लोगों के खाने-पीने वह अन्य रोजमर्रा की जरूरतें, इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है.

जानकारी के अनुसार लखनऊ में इस समय लोकबंधु अस्पताल में 21 कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों को रखा गया है. इनके लिए अलग कमरे, पानी, कपड़े, चप्पल आदि प्रशासन की तरफ से मुहैया कराए गए हैं. साथ ही इनके भोजन के लिए एक स्वाथ्यकर्मी रोज सुरक्षा किट पहनकर जाता है और इन्हें भोजन उपलब्ध कराता है.



एडिशनल सीएमओ केपी त्रिपाठी बताते हैं कि- 
1. पहले उस पूरे एरिया को टेप या तार लगाकर सुरक्षित किया जाता है.
2. अगर किसी बिल्डिंग के किसी फ्लैट में सूचना है तो उस पूरे फ्लोर को किया जाता है. पूरी सोसाइटी ही प्रभावित है तो सोसाइटी के बाहर टेप लगाकर सुरक्षित किया जाता है.
3. इसके बाद सैनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू होती है. यहां फर्श से लेकर दीवार तक केमिकल का छिड़काव किया जाता है.
4. चूंकि ये वायरस 400 माइक्रॉन से भी छोटा है लिहाजा इसे खत्म करने के लिए ऐसी जगहों, जो स्वाभाविक तौर पर कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आ सकती हैं, जैसे- दरवाजों के हैंडल, लिफ्ट, खिड़कियों के हैंडल, वॉश बेसिन आदि, पर विशेष सफाई की जाती है.
5. इन जगहों पर स्वास्थ्य कर्मी प्रोटक्शन किट पहनकर एक कपड़े को केमिकल में डिप कर 1 मिनट तक की समयावधि तक रगड़ते हैं. ऐसा जरूरी है क्योंकि बिना रगड़े वायरस के बचे रहने की संभावना बनी रहती है.
6. पूरी बिल्डिंग के लोगों का सैंपल लिया जाता है.
7. इसमें किसी को भी बुखार, खांसी, जुकाम आदि होता है तो उसे 14 दिन तक सेल्फ आइसोलेशन में रहने की हिदायत दी जाती है. साथ ही तबीयत खराब होने पर फौरन संपर्क करने के लिए कहा जाता है.
8. जिस घर में संक्रमण मिलता है, वहां विशेष तौर पर केमिकल से रगड़कर सफाई की जाती है और एक मिनट तक रगड़ने की प्रक्रिया का पालन किया जाता है.
9. नियम के अनुसार सोसाइटी के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें जैसे खाना प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया जाता है. उन्हें पानी या अन्य किसी चीज की कमी होती है तो जिला प्रशासन उनकी मदद करता है.
10. प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग के अलावा बाहरी किसी व्यक्ति की एंट्री सोसाइटी में पूरी तरह प्रतिबंधित होती है.

इनपुट: अलाउद्दीन

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First published: March 21, 2020, 2:03 PM IST
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