कोरोना मरीजों के लिए जानलेवा ब्लैक फंगस की UP में दस्तक, मेरठ के बाद लखनऊ में मिले 3 केस

मेरठ के दो मरीजों के बाद लखनऊ में भी ब्लैक फंगस से पीड़ित तीन कोरोना मरीज मिले हैं (सांकेतिक तस्वीर)

मेरठ के दो मरीजों के बाद लखनऊ में भी ब्लैक फंगस से पीड़ित तीन कोरोना मरीज मिले हैं (सांकेतिक तस्वीर)

Lucknow News: लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में भर्ती तीन मरीजों में म्यूकरमाइकोसिस होने की पुष्टि की गई है. केजीएमयू के मेडिसिन डिपार्टमेंट में इनका इलाज चल रहा है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में कोरोना संक्रमित 3 मरीज घातक ब्लैक फंगस (Black Fungus) यानी म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) की चपेट में आ गए हैं. लख्ननऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में इन तीनों मरीजों में म्यूकरमाइकोसिस होने की पुष्टि की गई है. केजीएमयू के मेडिसिन डिपार्टमेंट में इनका इलाज चल रहा है. बता दें कोरोना के मरीजों में ब्लैक फंगस के होने की शिकायत मिल रही थी. अब केजीएमयू ने आधिकारिक तौर से मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि की है.

बता दें इससे पहले मेरठ में भी ब्लैक फंगस से पीड़ित दो कोविड मरीज़ मिले हैं. दोनों मरीज मुज़फ्फरनगर और बिजनौर के रहने वाले हैं. दोनों मरीजों का इलाज मेरठ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है. अस्पताल के डॉक्टर संदीप गर्ग ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि मरीज स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

दरअसल कोरोना संक्रमित मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले दिखने को मिल रहे हैं, जो जानलेवा है. डॉक्टरों के मुताबिक इससे संक्रमित मरीजों की मौत हो रही है.

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जानलेवा है ब्लैक फंगस

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्पिरेटरी विभाग के प्रमुख डॉ सूर्यकांत के अनुसार कोरोना संक्रमण के बाद पहले नौ दिन बहुत अहम हैं. संक्रमण के साथ अगर मरीज में ब्लैक फंगस की शिकायत हुई तो उसकी जान पर खतरा बढ़ सकता है. यह फंगस त्वचा के साथ नाक, फेफड़ों और मस्तिष्क तक को नुकसान पहुंचा सकता है.

अस्पतालों में ज्यादा खतरा!



डॉ सूर्यकांत ने बताया कि ब्लैक फंगस पहले से ही हवा और जमीन में मौजूद है. जैसे ही कोई कमजोर इम्युनिटी वाला व्यक्ति इसके संपर्क में आता है, तो उसके चपेट में आने की संभावना ज्यादा रहती है. डॉ सूर्यकांत के मुताबिक जो मरीज जितने लंबे समय तक अस्पताल में रहेगा, उसमें खतरा ज्यादा रहेगा. उन्होंने बताया कि फंगस पहले नाक से शरीर में प्रवेश करता है और फिर फेफड़ों से रक्त के साथ मस्तिष्क में पहुंच जाता है. संक्रमण जितना ज्यादा होगा, लक्षण भी उतना ही गंभीर होगा.

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