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डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान मौत मामले में पुलिस और जेल अफसरों को राहत, पत्नी को नोटिस  

डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान मौत मामले में पुलिस और जेल अफसरों को राहत, पत्नी को नोटिस  

डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान मौत मामले में पुलिस और जेल अफसरों को राहत

डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान मौत मामले में पुलिस और जेल अफसरों को राहत

Lucknow News: सीबीआई कोर्ट की ओर से खुद को बतौर आरोपी तलब किए जाने के आदेश के खिलाफ कर्मवीर सिंह, वीके गुप्ता और बीएस मुकुंद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचियों ने दलील दी थी कि इस मामले में सीबीआई अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है और सीबीआई ने डॉक्टर सचान की मौत को आत्महत्या माना था. याचियों की ओर से यह भी दलील दी गई कि सरकारी अधिकारी होने के कारण उन्हें तलब करने से पहले शासन से संस्तुति प्राप्त करना अनिवार्य था, जो सीबीआई कोर्ट ने नहीं किया.

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हाइलाइट्स

NHRM घोटाले में लखनऊ की जेल में बंद डॉ वाईएस सचान की हुई थी मौत
इस मामले में सीबीआई ने अपनी जांच के बाद मौत को आत्महत्या बताया था

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान की लखनऊ जेल में हुई मौत के मामले में 7 जुलाई को सीबीआई कोर्ट की ओर से बतौर आरोपी तलब किए गए तत्कालीन डीजीपी करमवीर सिंह, तत्कालीन एडीजी विजय कुमार गुप्ता और लखनऊ के तत्कालीन जेलर भीमसेन मुकुंद को तलब करने के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने डॉक्टर सचान की पत्नी और इस मामले की वादी मालती सचान को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी.

दरअसल, सीबीआई कोर्ट की ओर से खुद को बतौर आरोपी  तलब किए जाने के आदेश के खिलाफ कर्मवीर सिंह, वीके गुप्ता और बीएस मुकुंद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचियों ने दलील दी थी कि इस मामले में सीबीआई अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है और सीबीआई ने डॉक्टर सचान की मौत को आत्महत्या माना था. याचियों की ओर से यह भी दलील दी गई कि सरकारी अधिकारी होने के कारण उन्हें तलब करने से पहले शासन से संस्तुति प्राप्त करना अनिवार्य था, जो सीबीआई कोर्ट ने नहीं किया. वहीं सीबीआई के वकील अरुण सिंह ने भी माना कि सीबीआई ने मामले की बारीकी से जांच की थी और डॉक्टर सचान की मौत को आत्महत्या पाए जाने के बाद ही क्लोजर रिपोर्ट लगाई थी.

ये है पूरा मामला
26 जून 2011 को डॉक्टर सचान की मौत की एफआईआर लखनऊ के थाना गोसाईगंज में दर्ज कराई गई थी. डॉक्टर सचान की मौत की न्यायिक जांच की रिपोर्ट 11 जुलाई 2011 को आई जिसमें सचान की मौत को हत्या करार दिया गया था. वहीं 14 जुलाई 2011 को हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी. 27 सितंबर 2012 को सीबीआई ने जांच के बाद डॉक्टर सचान की मौत को आत्महत्या करार देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाई थी. मालती सचान ने सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट को प्रोटेस्ट अर्जी के जरिए चुनौती दी थी. सीबीआई कोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त कार्यवाही का आदेश दिया. 9 अगस्त 2017 को सीबीआई ने फिर से फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर इसे आत्महत्या बताया था. 19 नवंबर 2019 को सीबीआई कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर मालती सचान की अर्जी को परिवाद के तौर पर दर्ज कर लिया था. मालती ने कोर्ट में न्यायिक जांच रिपोर्ट, मेडिकल एक्सपर्ट ऑपिनियन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों के बयान के साथ सीबीआई द्वारा दर्ज बयानों का भी हवाला दिया. 7 जुलाई 2022 को सीबीआई कोर्ट ने सचान की मृत्यु को हत्या का मामला मानते हुए तत्कालीन डीजीपी करमवीर सिंह ,एडीजी बीके गुप्ता और आईजी लखनऊ सुवेश कुमार सिंह, लखनऊ के तत्कालीन जेलर बीएस मुकुंद को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था. सीबीआई कोर्ट के इसी आदेश को हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई थी.

Tags: Lucknow news, UP latest news

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