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'ये तब भी खामोश थे, ये आज भी खामोश हैं, आगे भी खामोश रहेंगे'

'ये तब भी खामोश थे, ये आज भी खामोश हैं, आगे भी खामोश रहेंगे'

बेंगलुरु में जहां सदन से लेकर सड़क तक जारी धरना प्रदर्शन जारी हैं वहीं आईएएस डीके रवि की मौत पर उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन की चुप्पी भी सवालिया निशान है। यूपी आईएएस एसोसिएशन ने शोक संवेदना तक नहीं जताई।

बेंगलुरु में जहां सदन से लेकर सड़क तक जारी धरना प्रदर्शन जारी हैं वहीं आईएएस डीके रवि की मौत पर उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन की चुप्पी भी सवालिया निशान है। यूपी आईएएस एसोसिएशन ने शोक संवेदना तक नहीं जताई।

बेंगलुरु में जहां सदन से लेकर सड़क तक जारी धरना प्रदर्शन जारी हैं वहीं आईएएस डीके रवि की मौत पर उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन की चुप्पी भी सवालिया निशान है। यूपी आईएएस एसोसिएशन ने शोक संवेदना तक नहीं जताई।

    बेंगलुरु में जहां सदन से लेकर सड़क तक जारी धरना प्रदर्शन जारी हैं वहीं आईएएस डीके रवि की मौत पर उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन की चुप्पी भी सवालिया निशान है। यूपी आईएएस एसोसिएशन ने शोक संवेदना तक नहीं जताई।

    यूपी आईएएस एसोसिएशन का हैरान कराने वाला कारनामा देखने को मिला। यूपी आईएएस एसोसिएशन ने शोक सभा तक नहीं की। हालांकि ऐसा पहली बार देखने को नहीं मिला है वर्ष 2009 में आईएएस हरविंदर राज की मौत पर भी खामोश था एसोसिएशन। पिछली हुकूमत में वरिष्ठ आईएएस घर में मृत पाए गए थे बाद में उनका मामला भी खुदकुशी बताकर रफा-दफा कर दिया गया था। तब भी खामोश था यूपी आईएएस एसोसिएशन और आज भी खामोश है।

    अपनी कुर्सी और अपने आराम में मगन हैं आईएएस अधिकारी। इस तरह का रवैया देखकर तो यही देखा जा सकता है कि आईएएस एसोसिएशन को कैडर की कोई चिंता नहीं एक ओर सीबीआइ जांच की मांग को लेकर राजधानी बेंगलुरु और टुमकुरु जिले में जगह-जगह पर धरना प्रदर्शन जारी रहे। एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बेंगलुरु के छात्रों ने भी जांच की मांग को लेकर जुलूस निकाला

    वहीं बड़ा सवाल तो ये है कि क्या यूपी आईएएस एसोसिएशन को भंग कर देना चाहिए?यंग आईएएस अफसर एसोसिएशन के इस संवेदनहीन रवैये को लेकर एसोसिएशन से खफा हैं। उत्तर प्रदेश 'ये तब भी खामोश थे,ये आज भी खामोश हैं,आगे भी खामोश रहेंगे'

    डीके रवि एक ईमानदार अधिकारी के तौर पर जाने जाते थे। बेंगलुरु से सटे कोलार के कलेक्टर के तौर पर वो आम लोगों में काफी लोकप्रिय थे क्‍योंकि उन्हों ने रेत माफिया के खिलाफ कड़ी कारवाई की थी। जब उनका तबादला वहां से हुआ तो कोलार बंद भी हुआ ताकि सरकार पर दबाव बनाकर उनका ट्रान्सफर रुकवाया जा सके।बेंगलुरु में एडिशनल कमिश्नर कमर्शियल टैक्स के तौर पर उन्होंने बिल्डर्स को टैक्स जमा करने के लिए मजबूर किया। कहा जा रहा है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं और वो काफी दबाव में थे।

    गौरतलब है कि आइएएस अफसर डीके रविकुमार अपने दक्षिण बेंगलुर के तावरेकेरे स्थित मादीवाला अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। पुलिस के अनुसार, उनका शव घर के बेडरूम में पंखे से लटका पाया गया। बताया जा रहा है कि रेत माफिया के खिलाफ आवाज उठाने वाले रवि को अक्सर धमकी भरे फोन भी आते थे। प्राथमिक जांच में पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है।

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